नवी मुंबई में भारत की ऐतिहासिक जीत, जेमिमा ने अमनजोत को समर्पित किया फील्डर मेडल
नवी मुंबई – नवी मुंबई ने रविवार को एक ऐतिहासिक पल देखा, जब भारत ने साउथ अफ्रीका को हराकर आईसीसी महिला वर्ल्ड कप अपने नाम किया। जीत के बाद मैदान पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इसी दौरान जेमिमा रोड्रिग्स ने अपने ‘बेस्ट फील्डर’ मेडल को साथी खिलाड़ी अमनजोत कौर को सौंपकर टीम भावना की मिसाल पेश की।
यह मेडल आमतौर पर व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए दिया जाता है, लेकिन जेमिमा ने इसे साझा सफलता का प्रतीक बना दिया। उन्होंने कहा कि अमनजोत के दो पल मैच की दिशा बदल गए।
अमनजोत ने साउथ अफ्रीका की पारी की शुरुआत में ही अपनी सटीक थ्रो से ओपनर टैजमिन ब्रिट्स को रनआउट किया। उस रनआउट ने मजबूत ओपनिंग साझेदारी तोड़ी और भारत की पकड़ मैच पर मजबूत की। इसके बाद उन्होंने 42वें ओवर में निर्णायक कैच पकड़कर भारत की जीत तय कर दी।
दीप्ति शर्मा की गेंद पर लॉरा वोलवार्ट ने ऊँचा शॉट खेला। अमनजोत ने पहले दो बार गेंद को फिसलने दिया, लेकिन तीसरे प्रयास में पकड़कर पूरे डी.वाई. पाटिल स्टेडियम को जश्न में डुबो दिया। उस कैच ने न केवल वोलवार्ट की 101 रनों की जुझारू पारी खत्म की, बल्कि साउथ अफ्रीका की उम्मीदों पर भी विराम लगा दिया।
मैच के बाद टीम के सेलिब्रेशन में जेमिमा ने अमनजोत को आगे बुलाया। उन्होंने कहा, “कुछ पल सैकड़ों या अर्धशतकों से भी बड़े होते हैं। आज अमनजोत ने वो पल दिया जिसने हमारी ज़िंदगी बदल दी। पहले रनआउट से खेल का टोन सेट किया और फिर वो कैच — उसने वर्ल्ड कप पकड़ा।”
अमनजोत की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, “यह मेरे जीवन का सबसे कठिन कैच था। मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया था, लेकिन आज भगवान ने तीन मौके दिए। आख़िरकार वह कैच मेरी मेहनत और भरोसे का फल था।”
भारत की इस ऐतिहासिक जीत में शैफाली वर्मा के 87 रन और दो विकेट, दीप्ति शर्मा की पांच विकेट झटकों वाली गेंदबाजी और श्री चरणी की सधी गेंदबाजी ने अहम भूमिका निभाई। फिर भी, अमनजोत के दो निर्णायक पल ने मैच की दिशा मोड़ दी।
जेमिमा और पूरी टीम ने माना कि अमनजोत की समझदारी और जज़्बे ने भारत को कप दिलाया। उन्होंने मैदान पर दिखाया कि क्रिकेट सिर्फ़ बल्ले और गेंद का नहीं, बल्कि हिम्मत और भरोसे का खेल भी है।
नवी मुंबई की रात जश्न से जगमगा उठी। हर चेहरे पर गर्व और हर दिल में एक ही आवाज़ थी — “भारत विश्व विजेता!”
