इजरायली सेना के वीडियो लीक से देश में बवाल, पूर्व अभियोजक पर जांच तेज
तेल अवीव — इजरायल इस हफ्ते भारी राजनीतिक और सैन्य संकट में डूब गया। सोमवार को पुलिस ने पूर्व सैन्य अभियोजक मेजर जनरल यिफ़ात टोमर-यरुशालमी को हिरासत में लिया। उन्होंने पिछले हफ्ते इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी थी। अपने पत्र में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने इजरायली सैनिकों द्वारा एक फ़िलिस्तीनी बंदी के साथ हुई यौन हिंसा का वीडियो लीक किया था।
घटना ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को हिला दिया। नेतन्याहू ने इसे 1948 के बाद का सबसे “गंभीर जनसंपर्क हमला” बताया। टोमर-यरुशालमी के इस्तीफे के बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने उनका वाहन समुद्र तट के पास छोड़ा हुआ पाया। कार में परिवार को लिखा एक रहस्यमय पत्र मिला। इससे अधिकारियों को शक हुआ कि उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया होगा।
तुरंत व्यापक खोज अभियान शुरू हुआ। ड्रोन और तटीय पेट्रोलिंग की मदद से पुलिस ने रविवार रात उन्हें जिंदा बरामद किया और पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
वीडियो से उजागर हुआ सैनिकों का अत्याचार
लीक वीडियो ने इजरायल के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर नई बहस छेड़ दी। यह वीडियो अगस्त 2024 में एक इजरायली न्यूज़ चैनल पर सामने आया था। इसमें दक्षिणी इजरायल के एक सैन्य ठिकाने पर रिजर्व सैनिकों को एक फ़िलिस्तीनी बंदी को घेरे हुए दिखाया गया। सैनिकों ने कैमरों से दृश्य छिपाने के लिए दंगा-रोधी ढालों का इस्तेमाल किया। इसके बाद उन्होंने बंदी की बेरहमी से पिटाई की और धारदार वस्तु से वार किया।
पीड़ित को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी पसलियां टूटी थीं, फेफड़ा फटा था और अंदरूनी चोटें थीं। घटना के बाद पांच सैनिकों पर अत्याचार के गंभीर आरोप लगे। सोमवार को अदालत में उनकी सुनवाई हुई, लेकिन उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया।
पूर्व सैन्य वकील ने क्यों लीक किया वीडियो?
टोमर-यरुशालमी ने अपने इस्तीफे में लिखा कि उन्होंने वीडियो “सच्चाई दिखाने” के लिए लीक किया। उनका कहना था कि सेना के भीतर जांच की प्रक्रिया को झूठा बताने वाली दक्षिणपंथी राजनीति के खिलाफ यह कदम जरूरी था। उन्होंने कहा, “जब किसी बंदी पर हिंसा की आशंका हो, तो जांच करना हमारा कर्तव्य है। दुर्भाग्य से अब हर कोई यह नहीं मानता कि कुछ कार्य ऐसे हैं जो कभी नहीं किए जाने चाहिए।”
सरकार का तीखा हमला
वीडियो लीक के बाद नेतन्याहू सरकार ने टोमर-यरुशालमी पर देशद्रोह का आरोप लगाया। दक्षिणपंथी नेताओं ने कहा कि उन्होंने इजरायल की छवि को नुकसान पहुंचाया है। नेतन्याहू के करीबी टीवी एंकर इनोन मागल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम अब लिंच फिर से शुरू कर सकते हैं।”
राजनीतिक हलकों में उनकी कथित “आत्महत्या कोशिश” को भी झूठा बताया जा रहा है। कुछ नेताओं का दावा है कि उन्होंने सबूत नष्ट करने के लिए यह नाटक रचा।
मामले की मौजूदा स्थिति
वहीं, पांचों आरोपी सैनिक यरूशलेम की सुप्रीम कोर्ट के बाहर अपने वकीलों संग प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजर आए। उन्होंने कहा कि मुकदमा रद्द किया जाए। हालांकि, देशभर में बहस अब सैनिकों की हिंसा से ज्यादा वीडियो लीक पर केंद्रित है।
तेल अवीव से उठे इस विवाद ने इजरायल के भीतर जवाबदेही और सेना की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
