ट्रंप ने पुतिन और शी जिनपिंग को बताया ‘सख्त और समझदार नेता’
वॉशिंगटन— अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ की। उन्होंने दोनों नेताओं को सख्त, समझदार और गंभीर बताया। ट्रंप सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम 60 मिनट्स में शामिल हुए, यह उनकी इस नेटवर्क से पहली बातचीत थी, जब कंपनी ने उनके साथ कानूनी विवाद सुलझाया।
ट्रंप से पूछा गया कि पुतिन और शी जिनपिंग में कौन ज़्यादा कठिन है। उन्होंने कहा, “दोनों सख्त हैं। दोनों बेहद समझदार हैं। दोनों गंभीर नेता हैं, जिनसे खेला नहीं जा सकता। ये ऐसे लोग नहीं हैं जो हल्की बातों में समय गंवाते हैं। ये लोग रणनीतिक सोच रखते हैं।”
बातचीत में ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन को युद्ध के लिए ज़िम्मेदार बताया। ट्रंप ने कहा, “अगर मैं राष्ट्रपति होता तो यह युद्ध कभी नहीं होता। पुतिन भी यह बात जानते हैं। बाइडेन के कार्यकाल में ही यह सब शुरू हुआ।”
उन्होंने दावा किया कि अपने चार साल के शासनकाल में उन्होंने अमेरिका की सेना को मज़बूत किया। “मैंने सेना को दोबारा खड़ा किया। हमारे पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियार हैं। यूक्रेन युद्ध में वही हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं,” उन्होंने कहा।
बातचीत में ट्रंप ने चीन से अपने रिश्तों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं। शी जिनपिंग एक मज़बूत और प्रभावशाली नेता हैं। हम एक-दूसरे को समझते हैं।”
हालांकि ट्रंप ने माना कि कोविड-19 महामारी के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा, लेकिन उन्होंने कहा कि “रिश्ते अब भी उतने ही मज़बूत हैं जितने पहले थे।” उन्होंने कहा, “दो बड़ी शक्तियों के बीच ऐसा संबंध ज़रूरी है, ताकि दुनिया स्थिर रहे।”
ट्रंप ने अपनी चीन नीति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी व्यापारिक रणनीति सोची-समझी थी। “जब मैंने चीन पर टैक्स लगाए, तो शुरुआत में नुकसान हुआ, लेकिन यह ज़रूरी कदम था। चीन ने दुर्लभ खनिजों पर नियंत्रण बना रखा है, जो उनकी ताकत का स्रोत है,” ट्रंप ने कहा।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने उस दौर में चीन के सामने कड़ा रुख अपनाया और इससे आर्थिक दबाव बना। पिछले हफ्ते ट्रंप ने चीनी वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क में 10 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की। उन्होंने इसे “सद्भावना का संकेत” बताया और कहा कि यह फैसला दक्षिण कोरिया में शी जिनपिंग से “सकारात्मक बातचीत” के बाद लिया गया।
ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका को अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, “पुतिन और शी जैसे नेता अपने देश के हितों के लिए आक्रामक रहते हैं। अमेरिका को भी उतनी ही गंभीरता से आगे बढ़ना होगा।”
ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। कई विश्लेषक इसे उनकी विदेश नीति के पुराने रुख की वापसी मान रहे हैं, जिसमें वे सख्त विरोधियों के साथ भी सीधा संवाद बनाए रखते थे।
