चार साल बाद चेन्नई लौटेगी Ford, ₹3,250 करोड़ से बनेगा नया इंजन प्लांट

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चेन्नई, तमिलनाडु – अमेरिकी ऑटो दिग्गज Ford Motor Company ने शुक्रवार को चेन्नई में दोबारा उत्पादन शुरू करने का ऐलान किया। कंपनी चार साल बाद अपने मराइमलाई नगर संयंत्र में काम शुरू करेगी। इस बार फोर्ड का फोकस कार नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के इंजन बनाने पर रहेगा।

कंपनी ₹3,250 करोड़ का निवेश करेगी। इससे एक अत्याधुनिक पावरट्रेन प्लांट बनेगा जो केवल वैश्विक बाजारों के लिए इंजन तैयार करेगा। यह निवेश महामारी के बाद किसी अमेरिकी वाहन निर्माता का भारत में सबसे बड़ा औद्योगिक कदम माना जा रहा है।

फोर्ड ने बताया कि इस परियोजना से 600 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां और सैकड़ों अप्रत्यक्ष अवसर सप्लाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बनेंगे। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया कि अभी भारतीय बाजार में कारों की वापसी की योजना नहीं है

फोर्ड ने 2021 में भारी घाटे और पुनर्गठन के कारण भारत में वाहन निर्माण बंद कर दिया था। उसने चेन्नई और गुजरात की फैक्ट्रियां बंद कीं। हालांकि, तमिलनाडु में कंपनी का तकनीकी और बिजनेस सर्विसेज डिवीजन आज भी करीब 12,000 कर्मचारियों के साथ सक्रिय है।

इस बार वापसी की शुरुआत सितंबर 2024 में तब हुई जब फोर्ड ने अमेरिका यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के साथ लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया। शुक्रवार को कंपनी ने राज्य सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर योजना को औपचारिक रूप दिया।

फोर्ड ने अपने बयान में कहा, “चेन्नई प्लांट अब अगली पीढ़ी के इंजन निर्माण का केंद्र बनेगा। यह भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क में और मजबूत करेगा।”

कंपनी के अंतरराष्ट्रीय बाजार समूह के अध्यक्ष जेफ मारेंटिक ने कहा, “चेन्नई प्लांट फोर्ड की वैश्विक उत्पादन रणनीति का अहम हिस्सा बनेगा। हम तमिलनाडु सरकार के सहयोग के लिए आभारी हैं।”

राज्य के उद्योग मंत्री टी.आर.बी. राजा ने फोर्ड की वापसी को तमिलनाडु के औद्योगिक माहौल में विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “फोर्ड की वापसी हमारे ऑटो सेक्टर को नई ऊर्जा देगी। राज्य सरकार उद्योग को हर संभव सहयोग देगी।”

फोर्ड ने बताया कि नया इंजन उन्नत तकनीक से लैस होगा। उत्पादन 2029 तक शुरू होने की उम्मीद है। संयंत्र की वार्षिक क्षमता 2.35 लाख इंजन होगी।

मराइमलाई नगर संयंत्र में साइट की तैयारी इसी साल शुरू होगी। कंपनी ने इसे अपनी लॉन्ग-टर्म रणनीति का हिस्सा बताया है।

फोर्ड की वापसी केवल एक कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि भारत के ऑटो सेक्टर में एक नई औद्योगिक उम्मीद की निशानी मानी जा रही है।


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