गुजरात: राज्य के 20 हजार स्कूलों को अत्याधुनिक मॉडल स्कूल बनाने के लिए विश्व बैंक देगा फंड

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 मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के तहत तीन वर्ष में 33 हजार कक्षाओं की कमी होगी पूरी



गांधीनगर/अहमदाबाद, 23 जुलाई (हि.स.)। गुजरात में भाजपा सरकार मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में तेजी ला रही है। इस मिशन के तहत राज्य के 20 हजार स्कूलों को आधुनिक बनाने का फैसला किया है। इनमें से 15 हजार सरकारी प्राथमिक स्कूल और पांच अनुदान प्राप्त माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। इस योजना के लिए विश्व बैंक सहयोग करेगी और यह एक पायलट परियोजना होगी।

गुजरात सरकार ने वर्ष 2020-21 के बजट में मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की घोषणा कर रखी है। इस मिशन के तहत स्कूलों में पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर क्लासरूम, स्मार्ट क्लासए अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब के साथ फिट इंडिया के तहत खेल उपकरण और विशेष गुणवत्ता और परिणामोन्मुखी शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए राज्य के शिक्षा विभाग में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार आने वाले दिनों में अत्याधुनिक मॉडल स्कूल बनाने जा रही है| जिसमें प्रतिभाशाली छात्रों के लिए विशेष आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार छह हजार स्कूलों को मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चुना जाएगा, जिसमें 300 से अधिक छात्रों वाले सभी प्राथमिक स्कूल और राज्य के सभी जिलों और तहेसिल में एक वर्ष में कम से कम एक स्कूल शामिल है। इनमें से 20 फीसदी प्राथमिक स्कूलों में करीब 50 फीसदी छात्र पढ़ रहे हैं। दूसरे चरण में 150 से अधिक छात्रों वाले नौ हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को आकांक्षी स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चुना जाएगा। इन नौ हजार स्कूलों में करीब 17 लाख छात्र पढ़ रहे हैं। मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के तहत दोनों चरणों में लगभग पांच सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को आधुनिक करने की भी योजना है। इस मिशन के तहत राज्य के स्कूलों में 33,000 कक्षाओं की कमी को अगले तीन वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा और चयनित स्कूलों को सभी प्रकार की उत्कृष्ट सुविधाएं प्रदान करने की योजना है।

जानकारी मिली है कि विश्व बैंक ने मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के लिए देशभर में पांच सौ करोड़ की फंडिंग करने का वादा किया है। इसके अलावा एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ 250 मिलियन देने की बातचीत अंतिम चरण में है। दुनिया में पहली बार एआईआईबी शिक्षा के लिए फंडिंग कर रहा है।

दरअसल, विश्व बैंक ने इस परियोजना की घोषणा की है। देशभर में स्कूली शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए यह भारत की पहली परियोजना है। अगले छह वर्ष में इस परियोजना से एक करोड़ से अधिक छात्रों को सीधे लाभ होगा। इसके अलावा यह आने वाली पीढ़ी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा।


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