भाभी-देवर के बीच बेटे का प्यार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की डॉक्यूमेंट्री में दिखेगा

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सवर्ण बहुल गांव परौंख में मेधा के जरिये कोविंद को मिली सामाजिक प्रतिष्ठा  पैतृक गांव में बाबा के नाम से जाने जाते हैं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 



कानपुर, 26 फरवरी (हि.स.)। रामनाथ कोविंद के राजनीतिक सफर और उनके देश के प्रथम नागरिक बनने तक का मुकाम हासिल करने के जीवन को कम ही लोग जानते हैं। इसको लेकर दूरदर्शन एक डॉक्यूमेंट्री बना रहा है, जिससे देशवासियों को पता चल सके कि बचपन से लेकर राष्ट्रपति पद पर आसीन होने तक उनका जीवन कैसा रहा। दूरदर्शन की टीम राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख पहुंचकर शूटिंग कर रही है। इस डॉक्यूमेंट्री में भाभी और देवर के बीच बेटे की तरह का प्यार मुख्य तौर पर सामने लाया जाएगा।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश से आते हैं। एनडीए ने जब उन्हें उम्मीदवार बनाया था, तभी से उनके राजनीतिक सफर पर देश में चर्चा होने लगी और उनके पैतृक गांव कानपुर देहात जनपद के परौंख को भी मीडिया में खूब प्रसारित किया गया। अब एक साल बाद उनका कार्यकाल खत्म होने जा रहा है तो दूरदर्शन देश के सामने उनके जीवन से जुड़ी अहम जानकारियों को जनता के सामने लाना चाहता है। दूरदर्शन की टीम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए कानपुर और कानपुर देहात में डेरा डाले हुए है।
राष्ट्रपति का बचपन कानपुर देहात में गुजरा और कानपुर में शिक्षा ग्रहण कर देश के प्रथम नागरिक बनने तक का सफर तय किया। वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो गये और घाटमपुर लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। घाटमपुर रिजर्व सीट थी, जिस पर रामनाथ कोविंद 95,913 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। इसके बाद वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 2000 में पुनः उत्तरप्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे।
सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 19 जून, 2017 को भारत के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। भारत के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पश्चात 25 जुलाई, 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में कोविंद ने शपथ ग्रहण की। उनका राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसके चलते वह कभी प्रत्यक्ष चुनाव नहीं जीत सके लेकिन संघ और भाजपा से जुड़े होने के साथ ही अपनी मेधा से लोगों के चहेते बने रहे। इन्हीं सब पहलुओं को लेकर दूरदर्शन की टीम वीडियो शूट कर रही है। टीम ने राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख में उन लोगों से मुलाकात की जिनके साथ उन्होंने प्राथमिक पढ़ाई की और प्राथमिक के साथ जूनियर विद्यालय को भी शूट किया।
भाभी ने दिया बेटे की तरह प्यार 
ग्रामीण जानकारियां शूट करने के बाद टीम झींझक कस्बे पहुंची जहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाइयों का परिवार रहता है। हालांकि राष्ट्रपति के बड़े भाई शिवबालक राम अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी पत्नी विद्यावती से टीम ने बातचीत की। विद्यावती ने टीम को बताया कि लल्ला (राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद) महज पांच वर्ष के थे तभी परौंख स्थित पैतृक घर में आग लग गयी, जिसमें सास (कोविंद की मां) और लल्ला झुलस गये। इलाज के दौरान सास की मौत हो गयी और लल्ला के आंखों में बराबर आंसू रहते थे। इस पर पति ने कहा कि अब तुम्हें लल्ला को बेटे की भांति रखना है। पति की कही बात को दिल में संजोकर आज तक लल्ला को बेटे का प्यार मिल रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि 2007 में भोगनीपुर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में विधानसभा का चुनाव पूरी शिद्दत के साथ लड़े, पर उन्हें जीत नसीब नहीं हुई। उन्हें महज 26,550 वोट मिले थे। इस हार से वह बेहद निराश हो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। ऐसे समय में पति ने उन्हें पिता की तरह ढांढस बधाया। उनकी एक-एक बात को लल्ला ने आशीर्वाद के रूप में ग्रहण किया। ऐसे में यह माना जा रहा है कि डॉक्यूमेंट्री में दूरदर्शन की टीम देवर और भाभी के बीच बेटे का प्यार को अहमियत देने जा रही है। टीम के रमेश हितकारी ने बताया कि राष्ट्रपति से जुड़े पहलुओं की डॉक्यूमेंट्री बनाई जा रही है। शूटिंग पूरी होने के बाद इसका प्रसारण किया जाएगा।

 


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