उप्र में 2022 में लड़ी जानी है लोकतंत्र की आखिरी लड़ाई: अखिलेश

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कहा, भाजपा ने अपने कृत्यों से लोकतंत्र का गला घोंटाकिसान आन्दोलन के समर्थन में हुए प्रदर्शन में जेल भेजे गए कार्यकर्ताओं का किया सम्मान 



लखनऊ, 31 दिसम्बर (हि.स.)। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में सन् 2022 में लोकतंत्र की आखिरी लड़ाई लड़ी जानी है। जनता पर भरोसा है कि वह लोकतंत्र को न कमजोर होने देगी, न मरने देगी। सत्ता में खतरनाक लोग हैं। लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और समाजवादी व्यवस्था से भाजपा का कोई वास्ता नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की कुनीतियों से ऊबी जनता समाजवादी पार्टी की सरकार बनाना चाहती है। भाजपा अब सरकार में अपनी अनियमितताओं की जांच कराने के लिए तैयार रहे।
अखिलेश यादव गुरुवार को किसान आन्दोलन के समर्थन में धरने के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में घायल और जेल भेजे गए सपा नेताओं-कार्यकर्ताओं के अभिनंदन के अवसर पर उन्हें सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर नेता विरोधी दल विधानसभा रामगोविन्द चौधरी, मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी तथा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि 14 दिसम्बर 2020 को संघर्षरत किसानों के समर्थन में जब समाजवादी लखनऊ में धरना दे रहे थे तब पुलिस ने भाजपा सरकार के इशारे पर पहले बर्बरता से लाठीचार्ज किया जिसमें कई घायल हो गए। पुलिस ने जबरन महिलाओं और दिव्यांगों की भी गिरफ्तारी की। 69 कार्यकर्ताओं को जेल भेज दिया। जेल यात्रियों के साथ जेल में अपमान जनक व्यवहार किया गया। समाजवादी पार्टी ने आज उनका सम्मान किया।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी नेतृत्व ने आजादी की लड़ाई और आजाद भारत में भी जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरा और संघर्ष किया है। जेल यातना से समाजवादी झुकते नहीं हैं। पुलिस की बैरीकेडिंग और आंसू गैस, लाठीचार्ज से लोकतंत्र के कारवां को रोका नहीं जा सकता है। समाजवादी पार्टी का इतिहास अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का रहा है। भाजपा ने अपने कृत्यों से लोकतंत्र का गला घोंटा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट किया है। किसान तबाह हैं। नौजवानों का भविष्य अंधेरे में है। भाजपा कोई काम नहीं कर सकती है। भाजपा काम करने में नहीं काम बिगाड़ने में विश्वास रखती है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को किसान कभी माफ नहीं करेंगे। वह चंद हाथों में पूरी व्यवस्था सौंपने की साजिश कर रही है। बेरोजगारी डरावनी हो गई है। मजदूरों के पलायन से दुनिया भर में भारत की बदनामी हुई है।

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