चंदौली में दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल पर योगी करेंगे कैबिनेट की बैठक

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तीन मार्च को होने वाली बैठक में लिए जा सकते हैं पंडित दीनदयाल को केंद्रित कई महत्वपूर्ण फैसले



लखनऊ, 01 मार्च (हि.स.)। लीक से हटकर काम करने में भरोसा रखने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने कैबिनेट की बैठक चंदौली जनपद स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल पर करने वाले हैं। शासन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो आगामी मंगलवार की कैबिनेट बैठक वहां पर ही आयोजित होगी और इसमें एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल को केंद्रित कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने पिछले वर्ष 29 जनवरी को जब प्रयाग कुम्भ में कैबिनेट बैठक की थी, तो उसमें भी अधिकतर फैसले प्रयागराज को केंद्र में रखकर ही लिए गये थे। ऐसे में माना जा रहा है कि तीन मार्च की इस प्रस्तावित कैबिनेट बैठक के फोकस पंडित दीनदयाल उपाध्याय ही होंगे। सूत्रों की माने तो योगी सरकार चंदौली के पड़ाव स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल को पर्यटन मानचित्र पर लाने की योजना बना रही है। यह स्थल वाराणसी और मुगलसराय(अब दीनदायल नगर) के बीच स्थित है।
दरअसल, पंडित दीनदयाल जनसंघ के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के आदर्श रहे हैं। मथुरा में नगला चंद्रभान गांव में 25 सितम्बर, 1916 को जन्मे पंडित दीनदयाल की मुगलसराय रेलवे जंक्शन पर 11 फरवरी, 1968 को रहस्यमयी मौत हुई थी और उनका शव रेलवे जंक्शन के यार्ड में खंभा नंबर 1276 के पास मिला था। योगी सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र ने अगस्त 2018 में मुगलसराय रेलवे जंक्शन का नाम बदल कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया है।
इसके अलावा पंडित जी के विचारों और संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से भाजपा सरकार ने चंदौली के पड़ाव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल स्थापित किया, जिसका लोकार्पण बीते 16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
शासन के सूत्रों ने बताया कि योगी सरकार इस स्मृति स्थल को एक ऐसा पर्यटन केंद्र बनाना चाहती है, जहां आकर लोग एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को आत्मसात करें और उसे पूरी दुनिया में फैलाएं। मुख्यमंत्री योगी शायद इसी मंतव्य के साथ दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल पर कैबिनेट की बैठक करना चाहते हैं।
राजधानी से बाहर कुम्भ में हुई थी पहली कैबिनेट बैठक
उत्तर प्रदेश के इतिहास में कैबिनेट बैठक राजधानी लखनऊ में ही होती रही है। पंडित गोविंद वल्लभ पंत के शासन के दौरान वर्ष 1962 में एक बार प्रदेश कैबिनेट की बैठक नैनीताल में हुई थी। लेकिन, वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड अलग हुआ उसके बाद राजधानी के बाहर कैबिनेट बैठक करने का कीर्तिमान योगी सरकार ने ही बनाया। यह बैठक पिछले वर्ष 29 जनवरी को प्रयागराज के कुम्भ मेले में हुई और इसमें तीर्थराज प्रयाग के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये थे। उस समय मुख्यमंत्री योगी ने कहा था कि उनके इस कदम से भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक कुम्भ की चर्चा दुनिया भर में जरूर होगी। वैसे ब्रिटिश शासनकाल में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में कैबिनेट की कई बैठकें हुई थीं। दरअसल, उस समय संयुक्त प्रांत की राजधानी इलाहाबाद थी और लेजिसलेटिव काउंसिल की भी बैठकें वहां होती थीं।
कुछ देशों में भी हुई हैं कैबिनेट की यादगार बैठकें
दुनिया के कुछ देशों ने भी विशेष उद्देश्यों के लिए लीक से हटकर इस तरह की यादगार कैबिनेट बैठकें की हैं। इनमें मालदीव ने वर्ष 2009 में समुद्र के अंदर कैबिनेट बैठक की थी। इसका उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से दुनिया को आगाह करना था। वहां के राष्ट्रपति की अध्यक्षता में मालदीव सरकार की कैबिनेट ने इस ऐतिहासिक बैठक में दुनिया के सभी देशों से खतरनाक गैसों के उत्सर्जन में कटौती करने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। यह बैठक समुद्र में करीब 20 फीट नीचे लगभग 30 मिनट तक चली थी। दरअसल ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है। इससे समुद्र में जलस्तर बढ़ने से मालदीव जैसे देशों के डूबने का खतरा है।
इसी तरह जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय को हो रहे नुकसान पर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए नेपाल सरकार ने वर्ष 2009 में ही तीन दिसम्बर को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप से करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर कैबिनेट की बैठक की थी। इसमें नेपाल के प्रधानमंत्री समेत 22 मंत्रियों ने हिस्सा लिया था।
ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते खतरे को लेकर ही मंगोलिया के मंत्रियों ने 26 अगस्त, 2010 को गोबी के रेगिस्तान में अपनी कैबिनेट बैठक की थी। मंगोलिया सरकार का मानना था कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण देश में बारिश कम हो रही है। साथ ही बढ़ते तापमान के कारण नदी और झरने सूख रहे हैं और बर्फ पिघलने लगी है। इससे देश पर खतरा मंडरा रहा है।
इसके अलावा क्रोशिया कैबिनेट के सदस्यों ने वर्ष 2018 में अपने देश की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की जर्सी पहनकर कैबिनेट बैठक की थी। उस समय क्रोशिया की फुटबॉल टीम ने इंग्लैंड की टीम को हराया था और फ्रांस के साथ वह फाइनल मैच खेलने जा रही थी। ऐसे में अपने खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए क्रोशिया कैबिनेट के सभी सदस्य फुटबॉल टीम की जर्सी पहनकर इस बैठक में शामिल हुए थे।

 


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