महिला प्रोफेसर को मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं मिलने पर दिल्ली विश्वविद्यालय को नोटिस

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-जस्टिस सुरेश कैत ने 10 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश।
नई दिल्ली, 29 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय में तदर्थ महिला प्रोफेसर्स को मअवकाश का लाभ नहीं देने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया है। जस्टिस सुरेश कैत ने 10 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका अरविंदो कॉलेज की एक महिला प्रोफेसर ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट के तहत उसे छह माह की छुट्टी मिलनी चाहिए थी लेकिन विश्वविद्यालय ने उसकी छुट्टी यह कहते हुए स्वीकृत नहीं किया गया कि वो स्थायी प्रोफेसर नहीं है बल्कि तदर्थ प्रोफेसर है। इसके लिए याचिकाकर्ता ने पिछले 4 जनवरी से कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से मिली लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। याचिकाकर्ता ने तीन फरवरी को बच्चे को जन्म दिया। उसके बाद से वह छुट्टी पर है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने मातृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं किया है, वो बिना वेतन के छुट्टी पर हैं।

याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उस कानून के मुताबिक याचिकाकर्ता मातृत्व अवकाश की हकदार थी। दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील ने कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ता का कॉन्ट्रैक्ट हर चार महीने पर रिन्यू होता था और फिलहाल उसका कॉन्ट्रैक्ट 18 मार्च को खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय का ये नीतिगत फैसला है कि मातृत्व अवकाश का लाभ उन्हीं प्रोफेसर्स को दिया जाएगा जो स्थायी हों।


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