भाजपा के प्रथम पंक्ति के चेहरों के नाम कटने से दूसरी कतार में उत्साह

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लखनऊ, 22 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रथम पंक्ति के चेहरों के टिकट कटने या खुद से लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा से दूसरी कतार में बैठे नेताओं के खेमे में काफी उत्साह का माहौल है।
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के प्रत्याशियों की गुरुवार को सूची की घोषणा की गई। इस सूची के आने से पहले ही देवरिया लोकसभा सीट से सांसद व भाजपा के कद्दावर नेता कलराज मिश्र ने चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी। कलराज मिश्र के चुनाव न लड़ने की घोषणा से देवरिया लोकसभा सीट पर अन्य किसी सामाजिक चेहरे के चुनाव लड़ने की सम्भावना बढ़ गयी है। माना जा रहा है कि देवरिया सीट पर सामाजिक समीकरण को देखते हुए ब्राह्मण चेहरे के अलावा अन्य वर्ग से भी प्रत्याशी चुना जा सकता है।
इसी तरह से भाजपा के शीर्ष नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी के कानपुर से टिकट कटने की प्रबल आशंका है। कानुपर से चुनाव लड़ने से पहले डॉ. जोशी वाराणसी व इलाहाबाद से चुनाव लड़कर सांसद पहुंच चुके हैं। भाजपा की वर्तमान राजनीति में जोशी एक बड़े चेहरे के रुप में हैं और उनकी छवि राजनीति के साथ अन्य प्रबुद्ध वर्गो के​ लिए भी प्रेरणादायी है।
हिन्दुत्व की फायर ब्राण्ड नेता व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती भी 2019 का लोकसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। उनके इस घोषणा के बाद झांसी समेत बुन्देखण्ड के दूसरी पक्ति के नेताओं में अपनी—अपनी दावेदारी करने की होड़ लगी हुई है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी एक अलग जगह बना चुके हैं। वाराणसी से आने वाले डॉ. पाण्डेय आजकल चुनावी समीकरण बनाने और लोकसभा प्रत्याशी चयन में व्यस्त हैं। इसी तरह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से आने से प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक भी पश्चिम यूपी में पार्टी के संघठनात्मक ढांचा को निरन्तर मजबूत करने में जुटे हुये हैं। विजय बहादुर पाठक भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल के बेहद करीबी माना जाता है।
दूसरे दल से आये डॉ.रीता बहुगुणा जोशी, ब्रजेश पाठक और अशोक बाजपेई भी अपने समाज के बीच में अच्छी पैठ रखते हैं। उनके विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल होने के बाद से उनका समाज तेजी से भाजपा की ओर झुका है। लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, बलरामपुर, अम्बेडकरनगर, बाराबंकी, प्रयागराज, कौशम्बी में ब्राह्मण समाज के नेताओं को इन चेहरों ने जोड़ रखा है।
पहले पंक्ति के नेताओं के प्रदेश की राजनीति से जाने के बाद दूसरी कतार में खड़े चेहरों को भाजपा में अच्छी जगह मिल सकती है। फिलहाल दूसरी कतार के नेताओं को लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर प्रचार कर जीत हासिल कराने की जिम्मेदारी है। डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय, विजय बहादुर पाठक सरीखे नेता तो चौबीस घंटे चुनावी कार्य में व्यस्त हैं।
उप्र में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे केशरी नाथ त्रिपाठी, रमापति राम त्रिपाठी, डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेई की भी अपने समाज के बीच अच्छी पैठ है। केशरी नाथ त्रिपाठी आजकल पश्चिम बंगाल में राज्यपाल के पद पर विराजमान है तो रमापति राम त्रिपाठी लखनऊ लोकसभा के प्रभारी बनाए गए हैं और उनके पुत्र सांसद शरद पति त्रिपाठी दोबारा टिकट मांग रहे हैं। इसी तरह से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई भी टिकट की आस में थे, जो पूरी नहीं हुईं।


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