फिल्मों की पाइरेसी रोकने को लेकर केंद्र सरकार का कड़ा फैसला

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मुंबई , (हिंस)। केंद्र की मोदी सरकार ने सिनेमा की दुनिया को बेहतर बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पाइरेसी के मामले में कड़ा फैसला किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से उस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है, जिसमें कहा गया है कि पाइरेसी के मामले में पकड़े गए किसी भी व्यक्ति को तीन साल की जेल या दस लाख रु. का जुर्माना या फिर दोनों की सजा के प्रावधान किए गए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1952 के सिनेमाटोग्राफी एक्ट में संशोधन को मंजूरी देते हुए ये अहम फैसला किया। इस फैसले के बाद अगर सिनेमाघर में किसी व्यक्ति को मोबाइल से फिल्म को कापी करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। फिल्म इंडस्ट्री ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। फिल्म निर्माताओं की संस्था गिल्ड ने इस फैसले का स्वागत करते हुए एक बयान जारी करते हुए मोदी सरकार को इस फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। गिल्ड के अध्यक्ष और निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर का कहना है कि इस फैसले से पाइरेसी की रोकथाम में मदद मिलेगी। माना जाता है कि पाइरेसी से फिल्म इंडस्ट्री को हर साल 500 करोड़ से ज्यादा का घाटा उठाना पड़ता है। पिछले दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई आए थे, तो उनके साथ मुलाकात के दौरान फिल्मों की दुनिया के प्रतिनिधिमंडल ने पाइरेसी का मुद्दा उठाते हुए सिनेमाटोग्राफी एक्ट में बदलाव की मांग की थी, जिसे केंद्र सरकार ने अब आकर मंजूरी दी है।

सिनेमा की दुनिया को राहत देने के लिए केंद्रीय सरकार ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पिछले दिनों संसद में पेश किए गए बजट में सभी फिल्मों की शूटिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। सरकार जीएसटी कानून में बदलाव लाते हुए टिकट दरों में 18 प्रतिश्त की दर घटाकर 12 प्रतिश्त कर दिया गया है। अटल बिहारी सरकार ने ही सबसे पहले मनोरंजन की दुनिया को उद्योग के तौर पर मान्यता दी थी।


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