गणतंत्र दिवस परेड में प्रस्तुत झांकी ‘किसान गांधी’ को प्रथम पुरस्कार

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नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से गणतंत्र दिवस परेड में प्रस्तुत झांकी ‘किसान गांधी’ को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
आईसीएआर के जन संपर्क अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत करते हुए मंगलवार को कहा कि इस झांकी को तैयार करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। इसके डिजाइन और सजावट के लिए टीम ने बहुत काम किया था। अनिल ने कहा कि झांकी के सजावट में प्रयोग की गई हर चीज खास थी। उन्होंने कहा कि झांकी की तैयारी के दौरान उनकी टीम ने नागपुर के बापू आश्रम का दौरा किया। वहां बापू से जुड़ी हर बात का अध्ययन किया गया। बापू किसानों के बारे में क्या सोचते थे, उसी को ध्यान में रखते हुए झांकी को तैयार किया गया।
अनिल ने कहा कि सजावट में प्रयोग किया गया कॉटन खासतौर से सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर कॉटन रिसर्च (नागपुर) से मंगाया गया था।
झांकी में जिस चरखे से सूत काटती कस्तूरबा गांधी को दिखाया गया था, वह खासतौर पर गांधी आश्रम मेरठ से मंगाया गया था। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए बापू क्या सोचते थे, इस बात को झांकी में दिखाने की हर संभव कोशिश की गई।
उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आईसीएआर की टीम को पुरस्कार प्रदान किया था। भाकृअनुप (भारतीय कृषि अनुंसधान परिषद) की झांकी ‘किसान गांधी’ ने ग्रामीण समुदायों की समृद्धि के लिए कृषि और पशुधन को बेहतर बनाने के लिए गांधीजी के दृष्टिकोण को चित्रित किया। अधिक जानकारी हासिल करने के लिए, उन्होंने 1927 में भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर केंद्र में पंद्रह दिनों के लिए डेरी फार्मिंग के एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया था। उन्होंने इंदौर के इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट इंडस्ट्री में 1935 में खाद बनाने की ‘इंदौर विधि’ को भी देखा था और उसकी सराहना की थी।


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