गणतंत्र दिवस परेड में त्रिपुरा की झांकी सर्वश्रेष्ठ, जम्मू व कश्मीर दूसरे और पंजाब तीसरे स्थान पर

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नई दिल्ली, 28 जनवरी (हि.स.)। राजपथ पर 70वें गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘गांधीवादी तरीके से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना’ का संदेश देने वाली त्रिपुरा की झांकी को इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ झांकी का खिताब मिला है। ‘गांधी जी हमारी समग्र संस्कृति की आशा के पुंज’ थीम पर आधारित जम्मू और कश्मीर की झांकी को दूसरा स्थान जबकि जलियावाला बांग में 13 अप्रैल 1919 को स्वतंत्रता सेनियों की गोलियों से भूनकर हुई नृशंस हत्या को प्रदर्शित करने वाली पंजाब की झांकी को तीसरा स्थान मिला है।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यहां राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में आयोजित समारोह में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। इस साल गणतंत्र दिवस परेड की झांकियों को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आधारित थीम दी गई थी। सभी 16 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों तथा रेल सहित केंद्र सरकार के 6 मंत्रालयों की झांकियों में गांधी और उनसे जुड़े प्रसंगों को दर्शाया गया था। मंगलवार को बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का समापन होगा।
विभाग की श्रेणी में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने संयुक्त रूप से पुरस्कार साझा किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेवी चिल्ड्रन स्कूल को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले स्कूल के रूप में चुना गया, जबकि दिल्ली के ही राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय किशनगंज को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी में पुष्प सज्जा के लिए सीपीडब्ल्यूडी को विशेष पुरस्कार दिया गया।
त्रिपुरा के सूचना और सांस्कृतिक मामलों के उप निदेशक भास्कर दास गुप्ता ने कहा कि यह सर्वश्रेष्ठ के लिए एक परीक्षा थी और इस झांकी के माध्यम से राज्य ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रति महात्मा गांधी के विचारों को दर्शाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता को चरखा, बुनकर और स्वच्छ भारत ट्यून गीत श्रद्धांजलि थी।
जम्मू-कश्मीर सरकार के उप सचिव नजीर लद्दाखी ने कहा गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनना और रक्षा मंत्री से दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य को लंबे समय के बाद पुरस्कार मिला और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी कलाकारों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
पंजाब सरकार के सूचना और सार्वजनिक संबंध सचिव गुरकीरत कृपाल सिंह ने कहा कि जलियांवाला बाग की घटना का यह शताब्दी वर्ष था और हम उत्सुक थे कि यह घटना प्रदर्शित की जाए ताकि युवा पीढ़ी इसके बारे में जानें।


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