ट्रेनों में इंजन से बन रही बिजली, बच रहा है खर्च

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भोपाल, 16 जनवरी (हि.स.) । रेलवे अब ट्रेनों के इंजन में बिजली तैयार कर रहा है। सफेद और हरे इंजनों (डब्ल्यूजी9-डब्ल्यू जी5) में यह काम किया जा रहा है। एक इंजन से करीब एक हजार यूनिट बिजली तैयार की जा रही है। इससे रेलवे का बिजली पर होने वाला खर्च बच रहा है।
पश्चिम रेलवे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) प्रियंका दीक्षित ने बुधवार को बताया कि रेलवे, बिजली बचाने के साथ ही पर्यावरण को देखते हुए नई योजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें सोलर से बिजली बनाना भी अहम है। ट्रेनों के इंजन से तैयार होने वाली बिजली के इस्तेमाल की दिशा में भी काम जारी है।
जानकारी के मुताबिक 40 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक गति से चल रही ट्रेन को रोकने के लिए चालक डायनामिक ब्रेक लगाते हैं, तो इंजन में आने वाली बिजली कट जाती है। फिर वही इंजन डायनेमो की मदद से बिजली बनाने लगता है। यह बिजली उन्हीं तारों से वापस ग्रिड में चली जाती है। इस व्यवस्था से एक इंजन में जितनी बिजली की खपत होती है, उसका 15-20 फीसदी वह वापस कर देता है।
शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों में जनरेटर कोच हटाने की तैयारी भी रेलवे ने शुरू कर दी है। नई दिल्ली-कालका शताब्दी एक्सप्रेस में प्रयोग सफल होने के बाद इस तकनीक को राजधानी और अन्य ट्रेनों में अपनाया जा रहा है। अफसरों के मुताबिक विद्युतीकृत लाइनों पर इंजन से ही कोचों को बिजली दी जाएगी। इंजनों में कन्वर्टर लगाए गए हैं। इनसे ओवरहेड वायर से बिजली की आपूर्ति कोच में एसी तथा अन्य जरूरतों को पूरा करेगी। इससे ट्रेनों में अब जनरेटर लगाने की जरूरत नहीं होगी। 


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