पिछले चार साल में 13,000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में हुई वृद्धि : प्रकाश जावड़ेकर

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कहा, वन हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग



नई दिल्ली, 30 दिसम्बर (हि.स.)। देश में पिछले चार सालों में वन क्षेत्र में 13,000 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, केरल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश का रहा है। इन प्रदेशों में वन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोतरी हुई है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में जंगल क्षेत्र पहले के मुकाबले घटा है।

सोमवार को फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इडिया 2019 को जारी करते हुए केन्द्रीय वन व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि वन हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। हमारे समाज में ही वनों को बचा कर रखने का उदाहरण मौजूद है। विश्नोई समाज के लोग अपने वनों के प्रति काफी सजग होते हैं, उसी तरह पहाड़ों में भी गांवों में परंपरा है कि वे अपने इश्वर के लिए एक वन तैयार करते हैं। रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां घने, मध्यम और कम घने जंगलों में एक साथ वृद्धि देखने को मिली है। खुशी है कि पिछले चार सालों में देश में 13,000 वर्ग किलोमीटर जंगल क्षेत्र बढ़ा है। मैंग्रूव का जिक्र करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि लोगों के सहयोग से पहाड़ों और समुद्री किनारों के जंगलों में भी वृद्धि हुई है।

बांस के जंगलों में वृद्धि पर संतोष जताते हुए कहा कि सरकार के फैसले के कारण बांस के क्षेत्रफल में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है और इसे और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पेरिस समझौते के तहत भारत ने 250 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा था जिसे 25 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। कैंपा फंड के बारे में उन्होंने कहा कि जिस कैंपा फंड को पिछली सरकारों ने खर्च नहीं किया, नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इसमें रखे 47000 करोड़ रुपए के फंड को राज्यों में वितरित किए गए हैं। जल संरक्षण की उपयोगिता और महत्व पर भी उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान जैसे सूखा ग्रस्त क्षेत्र में भी वन क्षेत्र का बढ़ना बताता है कि कैसे लोग वहा जल संरक्षण को लेकर जागरूक हुए हैं। वनों का विकास मोदी सरकार की नीति है।

 


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