मेट्रो डेयरी घोटाला मामले में ईडी के रडार पर मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव गौतम सान्याल

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धन शोधन और विदेशी मुद्रा विनिमय की धाराओं के तहत जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की रडार पर अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रधान सचिव रहे आईएएस अधिकारी गौतम सान्याल आ गए हैं। मेट्रो डेयरी का बिक्री के समय सान्याल राज्य के प्रधान सचिव थे।



कोलकाता, 29 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में रोजवैली और सारदा चिटफंड घोटाले के बाद अब मेट्रो डेयरी घोटाला राज्य सरकार के गले की फांस बन गया है। इस मामले में धन शोधन और विदेशी मुद्रा विनिमय की धाराओं के तहत जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की रडार पर अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रधान सचिव रहे आईएएस अधिकारी गौतम सान्याल आ गए हैं। मेट्रो डेयरी का बिक्री के समय सान्याल राज्य के प्रधान सचिव थे।
जांच एजेंसी के सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत चलने वाले मेट्रो डेयरी को केवेंटर एग्रो लिमिटेड नाम की कंपनी को बेचने के मामले में कई संदिग्ध चीजें सामने आई हैं। इसे बेचने का निर्णय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में जब लिया गया था, उस समय गौतम सान्याल प्रधान सचिव थे इसीलिए उनसे पूछताछ की तैयारी हो रही है।
दरअसल राज्य सरकार के प्राणी संपद विभाग के अंतर्गत मेट्रो डेयरी था। इसका 47 फीसदी शेयर राज्य सरकार के पास था जबकि बाकी का 53 प्रतिशत केवेंटर्स एग्रो लिमिटेड के पास था। 2017 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई और मेट्रो डेयरी का 47 फीसदी शेयर भी केवेंटर्स एग्रो को महज 85.5 करोड रुपये में बेच दिया गया था। इस डील के चंद दिनों बाद ही केवेंटर्स इंडिया लिमिटेड ने सिंगापुर की एक इक्विटी कंपनी को मेट्रो डेयरी का महज 15 फीसदी शेयर 170 करोड़ रुपये में बेच दिया था। इस लिहाज से अगर देखा जाए तो राज्य सरकार को 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। लोकसभा में कांग्रेस के नेता और मुर्शिदाबाद के बहरामपुर से सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इसे लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में मामला दायर किया है।
इस मेट्रो डेयरी बिक्री मामले में विदेशी मुद्रा विनिमय हुआ है, इसलिए ईडी धन शोधन की जांच कर रही है। 2017 में हुए इस खरीद बिक्री के बाद से ही ने जांच शुरू कर दी थी और राज्य सरकार के अधिकारियों को नोटिस भेजकर इस बिक्री से संबंधित सारे दस्तावेज मांगे थे लेकिन दो सालों तक राज्य सरकार ने इसे दबा कर रखा। बाद में जब ईडी ने सख्ती बरतनी शुरू की और राज्य सचिवालय में छापेमारी की तैयारियां शुरू कर दी गई थी तब दबाव में आई बंगाल सरकार ने कुछ दस्तावेज की अधिकारियों को सौंपा था। अब उन दस्तावेजों की जांच के बाद पता चला है कि गौतम सान्याल की सहमति से यह खरीद बिक्री हुई थी, इसीलिए उनसे पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है। ईडी के अधिकारी इस सिलसिले में यह पता लगाना चाहते हैं कि सान्याल ने किसकी सहमति से मेट्रो डेयरी की बिक्री को हरी झंडी दी, उसमें स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रेसिजर (एसओपी) का पालन किया गया या नहीं। उनसे पूछताछ कर उनका बयान भी रिकॉर्ड किया जाएगा।
वहीं ईडी के एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, “हमने दस्तावेजों को जांचा है। कई संदिग्ध चीजें सामने हैं। गौतम सान्याल को जल्द नोटिस भेजा जाएगा। उनसे पूछताछ की जरूरत है। कई अन्य नौकरशाहों से भी पूछताछ होगी।”

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