गया में प्रतिबंधित बांग्लादेशी आंतकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन का रिक्रूटमेंट सेल

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गया में बांग्लादेशी आंतकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन का बहाली केंद्रबांग्लादेश और पश्चिम बंगाल से दूर मुस्लिम आबादी में मिलटी रही पनाह



गया, 28 अगस्त (हि.स.)। प्रतिबंधित बांग्लादेशी आंतकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन का “रिक्रूटमेंट सेल” गया बन गया है। इस बात का खुलासा गया में पिछले कुछ सालों के दौरान कई कुख्यात आतंकवादियों के पकड़े जाने से हुआ है। आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन का राष्ट्रीय “अमीर” एजाज उर्फ फैजाज उर्फ मोती अहमद उर्फ जीतू की रविवार की रात गया के बुनियादगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत पठान टोला से गिरफ्तारी ने एक बार फिर गया को चर्चा में ला दिया।
एजाज के पकड़े जाने के बाद पश्चिम बंगाल से सटे बिहार के सीमांचल जिलों अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में पुलिस हाई एलर्ट पर हैं। मंगलवार को रेंज आईजी बिनोद कुमार की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई हैं। आईबी की इनपुट के बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस ने एजाज को धर दबोचने के लिए धावा बोला साथ में पश्चिम बंगाल की आईबी टीम, बिहार पुलिस के डीआईजी विनय कुमार और गया के पुलिसकर्मी थे।
2013 में गया में महाबोधि मंदिर और आसपास के इलाके में सिरियल बम धमाके के साथ आतंकवादी घटना की शुरुआत हुई। इसके बाद गुजरात के अहमदाबाद बम ब्लास्ट का मास्टरमाइंड 13 सितम्बर 2017 तौसीफ को गया में पकड़ा गया। फिर बोधगया में बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा के प्रवास के दौरान 19 जनवरी 2018 को कालचक्र मैदान और आसपास सिरियल बम ब्लास्ट हुआ। बैटरी की दुकान में पहचान छिपा कर काम कर रहा आतंकवादी मोहम्मद अनवर उर्फ मुन्ना पकड़ा गया। ऐसे सभी पकड़े गए आतंकवादी गया और आसपास के मुस्लिम आबादी में शरण लिए हुए थे। कोई शिक्षक तो कोई फेरीवाले के रूप में मुहल्ला और गांव में जाना जाता था।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक गया में मुस्लिम आबादी करीब 10-11 प्रतिशत के आसपास हैं। ऐसे में आतंकवादी अपना सही परिचय छुपाकर किसी के यहां किराया में रहने में कामयाब हो जाते हैं। मकान मालिक भी सिर्फ उन्हें इस्लाम धर्मावलंबी होने मात्र से बगैर पुलिस को सूचना दिए दूसरे राज्यों के नागरिकों को किराए पर मकान दे देते हैं।
खुफिया सूत्रों के अनुसार 2016 में प्रतिबंधित बांग्लादेशी आंतकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन का दो गुटों में विभाजन हो गया। सरगना कौसर और सलाउद्दीन के नेतृत्व में दो गुट अस्तित्व में आया। 2016 के अंत में कौसर ने अपनी गिरफ्तारी के पूर्व एजाज को संगठन का “अमीर”घोषित कर दिया।
खुफिया सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक एजाज गया में रहकर “रिक्रूटमेंट सेल” के तहत कम पढ़े लिखे युवकों को संगठन से जोड़ता था। खुफिया एजेंसी इस बात का पता लगा रही है कि एजाज ने अब तक कितने युवकों को संगठन से जोड़ा है? ऐसे युवक अभी कहां है? खुफिया सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल से काफी दूर रहकर प्रतिबंधित बांग्लादेशी आंतकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन के लिए एजाज काम कर रहा था। चूंकि वह अपने परिवार के साथ गया में रह रहा था। इससे एजाज के लिए मोर्चे पर रहकर आतंकवादी संगठन के लिए घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी नहीं थी। इस प्रश्न का उत्तर खुफिया एजेंसियों एकत्रित करने के प्रयास में हैं।

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