पोलियो ग्रस्त भारतीय-अमेरिकी प्रणव देसाई को संयुक्त राष्ट्र से मान्यता

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प्रणव देसाई गुजरात के निवासी हैं और इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ एमबीए के सैप में विशेषज्ञ हैं। देसाई लॉस एंजेल्स आधारित निपो टेलिग्राफ़ के उपाध्यक्ष हैं।



लॉस एंजेल्स, 28 अगस्त (हि.स.)। पोलियोग्रस्त भारतीय-अमेरिकी आईटी कर्मी प्रणव देसाई को दिव्यागों के एक विशेष गैर सरकारी संगठन को संयुक्त राष्ट्र संघ के आर्थिक और सामाजिक काउंसिल ने परामर्शदात्री संगठन का दर्जा दिया है। यह संगठन ‘वायस ऑफ स्पेशली-एबल्ड पीपल’ भारत में भी दिव्यागों क्षेत्र में काम करता है।
प्रणव देसाई गुजरात के निवासी हैं और इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ एमबीए के सैप में विशेषज्ञ हैं। देसाई लॉस एंजेल्स आधारित निपो टेलिग्राफ़ के उपाध्यक्ष हैं। वह सन् 1999 में अमेरिका आ गए थे लेकिन उनका भारत प्रेम कभी कम नहीं हुआ। वह 2014 में अपने इस संगठन के कार्यकलापों के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अवगत करा चुके हैं। देसाई ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र से मान्यता मिलने के बाद दिव्यागों को समाज के विभिन्न क्षेत्रों में समानता और आदर मिल सकेगा। इस संगठन के मूल उद्देश्य में दिव्यागों के प्रति दुर्भावना को दूर करना है। अब यह संगठन संयुक्त राष्ट्र से मिले विशेषाधिकारों में संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों- न्यूयॉर्क, जेनेवा और विएना से सीधे सम्पर्क करने और मौजूदा सुविधाओं का उपयोग करने का मौका मिल सकेगा। देसाई ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने बताया कि वह जब चार साल की आयु के थे, पोलियो से ग्रस्त हो गए थे और दोनों पैर से लाचार हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अपने चौथे मंज़िल के निवास पर चढ़ने से नहीं चुके। इस कार्य में उनके माता-पिता ने भी उन्हें हर क़दम पर प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि इस ग़ैर सरकारी संगठन में 8000 स्वयंसेवी हैं। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य दिव्यागों में यह भाव पैदा करना है कि उन्हें आगे बढ़ते रहना है।

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