घाटी में पढ़ने वाले बाहरी राज्यों के लगभग 800 छात्रों को वापस भेजा गया

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घाटी छोड़ने की एडवाइजरी के बाद यात्रियों व पर्यटकों में मची अफरा-तफरी- अमरनाथ यात्रा के बाद अब मचैल यात्रा को भी रोक दिया गया- महबूबा मुफ़्ती ने सर्वदलीय बैठक बुलाई तो पुलिस ने होटल की बुकिंग रद्द कराई- श्रीअमरनाथ यात्रा मार्ग पर लंगर आयोजकों ने भी समेटे अपने शिविर- जम्मू स्थित यात्रा के आधार शिविर भगवती नगर को भी प्रशासन ने खाली करवाया



जम्मू, 04 अगस्त (हि.स.)। श्रीअमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले की आशंका के चलते शुक्रवार को राज्य प्रशासन द्वारा यात्रियों व पर्यटकों को लौटने की एडवाइजरी जारी करने के बाद से ही कश्मीर घाटी, यात्रियों व पर्यटकों में अफरा-तफरी का माहौल है। यात्री व पर्यटक कश्मीर घाटी से जल्द से जल्द लौटने के लिए प्रयासरत हैं। इस अफरा-तफरी के चलते विमानन कंपनियों ने भी किराए बढ़ा दिये हैं। हालांकि टिकट रद्द करने वाले यात्रियों व पर्यटकों को कुछ हद तक राहत देते हुए पूरा रिफंड किया जा रहा है। जम्मू रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों व पर्यटकों की भारी भीड़ होने से अफरा-तफरी का माहौल है।
कश्मीर घाटी में शिक्षा ग्रहण कर रहे बाहरी राज्यों के लगभग 800 छात्रों को वापस भेजा जा चुका है।
श्रीअमरनाथ यात्रा स्थगित होने के बाद शनिवार को जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले में चल रही मचैल यात्रा भी स्थगित कर दी गई है। मचौल माता यात्रा को तत्काल प्रभाव से रोकने की जानकारी देते हुए किश्तवाड़ जिला आयुक्त अंग्रेज सिह राणा ने कहा कि अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले के खतरे को देखते हुए अमरनाथ यात्रा के बाद अब मचैल यात्रा को भी रोक दिया गया है।
जम्मू में एहतियातन आरएएफ की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। डोडा, किश्तवाड़ व भद्रवाह में भी अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। कश्मीर घाटी व किश्तवाड़ से यात्री व पर्यटक बड़ी संख्या में लौट गए हैं और जो बचे हैं वह भी लौट रहे हैं। कुछ यात्री श्रीनगर से ही सीधे तौर पर दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं तो कुछ जम्मू पहुंच रहे हैं। श्री अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले के इनपुट मिलने के बाद शुक्रवार को यात्रा स्थगित कर दी गई थी। इस दौरान गृह सचिव शालीन काबरा ने निर्देश जारी किए थे कि कश्मीर घाटी में अमरनाथ यात्रा पर आए यात्री और पर्यटक जल्द से जल्द घाटी को छोड़ अपने घरों को लौट जाएं। लंगर आयोजक व सेवक भी अपने लंगर समेट कर वापस आ गए हैं। बालटाल व पहलगाम में लगी दुकानें, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए लगाए गए टेंट व लंगर सभी ने अपना सामान समेट लिया है। जम्मू और कश्मीर सरकार ने भारतीय वायु सेना से श्री अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों को कश्मीर घाटी से बाहर निकालने के लिए अनुरोध किया है। यात्रियों को जम्मू, पठानकोट या दिल्ली जैसे स्थानों पर छोड़ने के लिए कहा गया है। जहां से वे आसानी से अपने घरों पर जा सकें। जम्मू स्थित यात्रा के आधार शिविर भगवती नगर को भी प्रशासन ने खाली करवाना शुरू कर दिया है। किसी को भी वहां पर अब ठहरने नहीं दिया जा रहा है।
रविवार को राज्य पूर्व मख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने सर्वदलीय बैठक के लिए एक होटल बुक कराया था जिसकी बुकिंग पुलिस ने रद्द करवा दी जिसके बाद महबूबा मुफ़्ती ने शाम 6 बजे अपने घर पर सर्वदलीय बैठक बुलाई है। पुलिस ने सभी होटलों को एडवाइज़री जारी की है जिसमें सभी होटलों को राजनीतिक बैठक की इजाजत देने के लिए मना किया गया है।
जम्मू-कश्मीर से जल्द से जल्द तीर्थयात्री और पयर्टक राज्य से बाहर भेजे जा रहे हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार शनिवार को घाटी छोड़ने वालों में 6126 शामिल हैं। इनमें से 5829 यात्री 32 शेड्यूल फ्लाइट्स के माध्यम से रवाना हुए हैं। 387 यात्री भारतीय वायुसेना के 4 विमानों में रवाना हुए हैं। यात्रियों व पर्यटकों का वापस लौटना रविवार को भी जारी रहा। श्री अमरनाथ यात्रा रुक जाने के बाद लगभग 22 हजार पर्यटकों व श्रद्धालुओं के अलावा 30 हजार के करीब प्रवासी मजदूर भी अपने घरों की ओर लौट गए हैं और जो बचे हैं, वह भी सामान समेट रहे हैं। कश्मीर में किसी बड़े संकट की आशंका से घबराए स्थानीय लोग अपने घरों में राशन सहित जरूरी सामान जमा करने में लगे हैं। कई जगह पेट्रोल पंप मालिकों ने सरकारी सुरक्षा मिलने पर ही अपने पंप खोलने का एलान किया है। कई पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें दिख रही है।
मंडलायुक्त कश्मीर बसीर अहमद खान ने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक रूप से डर पैदा कर रहे हैं। कहीं राशन की कमी नहीं है। ईंधन का पूरा भंडार कश्मीर में है। अगर दो माह के लिए रास्ता बंद हो जाए तो भी हमारे पास पर्याप्त भंडार है। हम अफवाह फैलाने वालों और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। कश्मीर छोड़ने की एडवाइजरी सिर्फ सुरक्षा कारणों को देखते हुए जारी की गई है।
इस संबंध में जम्मू-कश्मीर विषयों के जानकार प्रो. हरि ओम से जब बात हुई तो उन्होंने कहा कि श्रीअमरनाथ यात्रा पर आतंकी खतरा हमेशा से रहा है और कई बार आतंकी यात्रा को निशाना बना चुके हैं। हर वर्ष आतंकी हमले की आशंका व इनपुट रहती है परन्तु इस बार सरकार द्वारा एकाएक यात्रा को रद्द कर देना और सभी पर्यटकों व यात्रियों को कश्मीर घाटी छोटने के लिए कहना इस ओर इशारा है कि सरकार आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर को लेकर कुछ नए फैसले करने जा रही है। सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती भी इस ओर इशारा कर रही है।

 


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