राजस्थान : कोटा के चिकित्सक ने की पोर्टेबल डिजिटल माइक्रोस्कोप की खोज

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यह डिवाइस मेडिकल साइंस, एग्रीकल्चर, वेटेनरी आदि में होगी उपयोगी



कोटा, 04 अगस्त (हि.स.)। कोटा के अनुभवी चिकित्सक डॉ. संजय सोनी ने ऐसी मेडिकल डिवाइस की खोज की है जिससे विभिन्न शहरों व कस्बों में सड़कों पर घूम रही निःशक्त गायों को दुधारू बनाने में सहयोग करेगी। इससे किसानों को दुग्धपालन व्यवसाय से आय के नये साधन विकसित होंगे। उन्होंने 10 वर्ष के अनुसंधान एवं परीक्षण के बाद 25 हजार रुपये के इस सस्ते उपकरण को लॉन्च किया है।
डॉ. सोनी ने बताया कि लम्बे समय से वे इस डिवाइस पर रिसर्च कर रहे थे। इसके जरिए आवारा घूम रही गायों का सस्ती चिकित्सीय जांच के जरिए शीघ्र उपचार कर उन्हें दुधारू बनाया जा सकेगा। उन्होंने इस डिवाइस के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। इस नई डिवाइस को नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) से मान्यता मिल चुकी है। इस डिवाइस के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले रोगियों, पशुधन की रक्त, थूक, यूरीन, पेप स्मीयर और मल इत्यादि की जांच हो सकेगी, जिससे रोग का पता लगाने में मदद मिलेगी तथा समय पर उपचार मिल सकेगा।
एलन मेडिइनोवेशन्स प्रा.लि. के निदेशक डॉ.सोनी ने बताया कि उन्होंने उच्च तकनीक वाली अल्ट्रा मॉडर्न रेजोल्यूशन वाले पोर्टेबल डिजिटल माइक्रोस्कोप का आविष्कार कर आईटी से मेडिकल साइंस में नवाचार किया है। यह डिवाइस चिकित्सा, अनुसंधान, कृषि व शिक्षा के क्षेत्र में वरदान साबित होगी। इससे सामान्य माइक्रोस्कोप की अपेक्षा किसी भी वस्तु का परीक्षण गहराई व स्पष्टता के साथ किया जा सकता है। साथ ही परीक्षण के समय उनके डिजिटल चित्र भी लेता है जिससे बीमारी का पता करने में आसानी हो जाती है। इस डिजिटल माइक्रोस्कोप के जरिए रक्त की पेरिफेरियल ब्लड स्मीयर (पीबीएफ), हिस्टोपैथोलोजी, सेल काउंट, फलोरोसेन्ट, माइक्रोस्कोपी, कॉन्ट्रास्ट माइक्रोस्कोपी आदि जांच की जा सकती है। इमेज को दूरस्थ बैठै पैथोलॉजिस्ट देख सकेंगे। इस उपकरण को कोई भी ऑपरेट कर सकता हैं जहां बिजली की सुविधा नहीं है वहां इसे यूएसबी अथवा सेलफोन के माध्यम से चलाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, इसलिए पशुपालक उसका पालन उचित तरीके से करके स्थायी आय का साधन बना सकते हैं। उन्होंने कोटा शहर में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है जिसके तहत अगले छह माह में शहर को आवारा घूम रही गायों को उपचार के जरिए दुधारू बनाया जाएगा। हाल ही में कोटा में चल रही 80 से अधिक गौशालाओं के संचालकों ने इस उपकरण को खरीदने पर सहमति दे दी है।

 


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