राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक राज्यसभा में पारित

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लोकसभा में इस विधेयक को गत 29 जुलाई (सोमवार) को पारित कर चुकी है।



नई दिल्ली, 01 अगस्त (हि.स.)। देशभर में चिकित्सा समुदाय के भारी विरोध के बीच राज्यसभा ने चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के बड़े कदम के रूप में भारतीय चिकित्सा आयोग विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार देश में मेडिकल शिक्षा की नियामक संस्था भारतीय चिकित्सा परिषद् नहीं रहेगी और उसका स्थान भारतीय चिकित्सा आयोग लेगा।

लोकसभा में इस विधेयक को गत 29 जुलाई (सोमवार) को पारित कर चुकी है। गुरुवार को राज्यसभा में पेश किए गए विधेयक में सरकार की ओर से चिकित्सा आयोग के गठन में राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से संशोधन पेश किया गया। सदन ने संशोधन के साथ यह विधेयक पारित कर दिया। अब यह विधेयक फिर से लोकसभा में जाएगा, जहां संशोधनों का अनुमोदन लेना होगा। उसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर विधेयक कानून बन जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने विधेयक के पारित होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि चिकित्सा सुविधा में सुधार के लिए मोदी सरकार की ओर से किया गया सुधार का यह बड़ा कदम है। चर्चा का उत्तर देते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि चिकित्सा आयोग में केन्द्र सरकार के हस्ताक्षेप के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि इसमें राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। उन्होंने इन आरोपों का भी खंडन किया कि विधेयक के प्रावधनों से झोलाझाप डाक्टरों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि वास्तव में ऐसे लोगों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों को और सख्त बनाया गया है।

अर्ध चिकित्सा कर्मियों जैसे कंपाउंडर, नर्स, लैब टेकनीशियन आदि को मध्य उपचार स्तर पर मेडिकल प्रेक्टिस करने की अनुमति दिए जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए मानदंडों का पालन किया जाएगा। ऐसे लोगों को आवश्यक चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विधेयक में राष्ट्रीय स्तर पर एक्जिट परीक्षा होगी जो एक तरह से एमबीबीएस के फाइनल परीक्षा की तरह होगी। परीक्षा में असफल होने वाले छात्र को दोबारा परीक्षा का मौका मिलेगा। इसके माध्यम से चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले छात्र को एमबीबीएस की डिग्री मिलेगी, मेडिकल रजिस्ट्रेशन मिलेगा, वह पेशेवर के तौर पर काम करना शुरू कर पायेगा और इसके आधार पर पीजी (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रमों में दाखिला ले पायेगा। विधेयक के कानून बनने के बाद आयोग का गठन 8 से 9 महीने में होगा और वह परीक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश जारी करेगा।

चिकित्सा आयोग में 25 सदस्य होंगे जिनमें से 21 20-25 वर्षों के अनुभव वाले डॉक्टर होंगे। इनकी पृष्टभूमि को कई स्रोतों से चेक किया जाएगा। उन्हें अपने परिवार के सदस्यों सहित अपनी संपत्ती का ब्यौरा सार्वजनिक देना होगा।

इसी बीच राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक के विरोध में गुरुवार को देशभर में डॉक्टरों की हड़ताल रही। दिल्ली के एम्स, सफदरजंग, आरएमएल समेत कई अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। दिल्ली सरकार और नगर निगम के अस्पतालों के डॉक्टर भी इसमें शामिल रहे। इनके साथ ही रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं।

 


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