सांसदों के कॉल रिकॉर्ड करना विशेषाधिकार का हनन: राज्यसभा समिति

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विशेषाधिकार समिति ने अरुण जेटली के कॉल रिकॉर्ड किए जाने, सदन के पूर्व सदस्य सीताराम येचुरी को धमकियां दिए जाने, सांसदों के बारे में साध्वी प्राची के अपमानजनक बयान और टेलीविजन चैनल सुदर्शन न्यूज के एक आपत्तिजनक प्रसारण के संदर्भ में अपनी रिपोर्ट सदन में पेश की।



नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने सदन में पूर्व नेता विपक्ष अरुण जेटली के कॉल रिकॉर्ड किए जाने के मामले में व्यवस्था दी कि अनधिकृत रूप से सांसदों का कॉल रिकॉर्ड किया जाना विशेषाधिकार का हनन और निजता के उल्लंघन का आपराधिक मामला है।

विशेषाधिकार समिति ने अरुण जेटली के कॉल रिकॉर्ड किए जाने, सदन के पूर्व सदस्य सीताराम येचुरी को धमकियां दिए जाने, सांसदों के बारे में साध्वी प्राची के अपमानजनक बयान और टेलीविजन चैनल सुदर्शन न्यूज के एक आपत्तिजनक प्रसारण के संदर्भ में अपनी रिपोर्ट सदन में पेश की।

जेटली के मामले में समिति ने कहा कि सांसदों के संसदीय कामकाज को प्रभावित करने वाले अनधिकृत कॉल रिकॉर्ड विशेषाधिकार हनन का  मामला है। समिति ने दिल्ली पुलिस से आग्रह किया कि इस संबंध में गिरफ्तार किए गए लोगों को दंडित कराने के लिए वह तत्परता से कार्रवाई करें।

उल्लेखनीय है कि जुलाई 2013 में अरुण जेटली के कॉल रिकॉर्ड किए जाने का मामला प्रकाश में आया था। राज्यसभा के सदस्य रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी को फोन और संदेशों के जरिए मिली धमकियों के मामले में समिति ने कहा कि दिल्ली पुलिस को इस संबंध में गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए प्रयास जारी रखना चाहिए।

हिन्दू संगठन की नेता साध्वी प्राची के सांसदों के बारे में दिए गए अपमानजनक बयान की समिति ने निंदा करते हुए कहा कि इस संबंध में समिति की ओर से किसी कार्रवाई से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। समिति ने उल्लेख किया कि साध्वी ने कहा था कि संसद में एक या दो आतंकवादी सदस्य हैं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में किसी सांसद का नाम नहीं लिया।

विशेषाधिकार समिति ने सदन के पूर्व सदस्य नरेश अग्रवाल के बारे में  टेलीविजन चैलन सुदर्शन न्यूज पर की गई टिप्पणी के बारे में कहा कि इस तरह के गैरजिम्मेदार तत्वों को महत्व देना संसद की गरिमा के खिलाफ है।

समिति ने केंद्र सरकार और सूचना प्रसारण मंत्रालय को सुझाव दिया कि वह सभी टेलीविजन चैनलों को दिशा-निर्देश जारी करे कि संसद की कार्यवाही का प्रसारण करते समय एहतियात बरतें और कार्यवाही से निकाले गए अंशों का प्रसारण न करे।

 


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