केदारनाथ जाना अपने आप से मिलने का एक अवसर था: मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों की आपाधापी के बीच मेरी केदानाथ यात्रा को लेकर कई लोगों ने उनसे सवाल किया।



नई दिल्ली, 30 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को लोकसभा चुनावों के अंतिम चरण में केदारनाथ गुफा में ध्यान लगाने को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पवित्र केदारनाथ की यात्रा उनके लिए खुद से मिलने का एक मौका था। प्रधानमंत्री चुनावों के अंतिम चरण से ठीक पहले केदारनाथ गए थे और एक गुफा में ध्यान लगाया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों की आपाधापी के बीच मेरी केदानाथ यात्रा को लेकर कई लोगों ने उनसे सवाल किया। असल में यह मेरे लिए खुद से मिलने का एक अवसर था। यह आपका हक है, आपकी जिज्ञासा भी मैं समझ सकता हूं और मुझे भी लगता है कि कभी मेरे उन भावों को आप तक कभी पहुंचाऊं, लेकिन आज मुझे लगता है कि अगर मैं उस दिशा में चल पड़ूंगा तो शायद ‘मन की बात’ का रूप ही बदल जाएगा और इसलिए चुनाव की इस आपाधापी, जय-पराजय के अनुमान, अभी पोलिंग भी बाकी था और मैं चल पड़ा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोगों ने उसमें से राजनीतिक अर्थ निकाले हैं। एक प्रकार से मैं खुद से मिलने चला गया था। मैं और बातें तो आज नहीं बताऊंगा, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ‘मन की बात’ के इस अल्पविराम के कारण जो खालीपन था, उसे केदार की घाटी में, उस एकांत गुफा में शायद कुछ भरने का अवसर जरूर दिया था। प्रधानमंत्री ने अपने पिछले कार्यकाल के अंतिम ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कुछ अंतराल के बाद एक बार फिर से मिलने के वादे को लेकर उठे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब मैंने आखिर में कहा था कि हम तीन-चार महीने के बाद मिलेंगे, तो लोगों ने उसके भी राजनीतिक अर्थ निकाले थे और लोगों ने कहा कि अरे, मोदी का कितना आत्मविश्वास है, उनको भरोसा है। आत्मविश्वास मोदी का नहीं था-ये विश्वास, आपके विश्वास के आधार का था। आप ही थे जिसने विश्वास का रूप लिया था और इसी के कारण सहज रूप से आख़िरी ‘मन की बात’ में मैंने कह दिया था कि मैं कुछ महीनों के बाद फिर आपके पास आऊंगा। असल मैं आया नहीं हूं-आपने मुझे लाया है, आपने ही मुझे बिठाया है और आपने ही मुझे फिर से एक बार बोलने का अवसर दिया है।

 


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