विश्वविद्यालयों में खाली पड़े हैं 809 संस्कृत शिक्षकों के पद

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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सोमवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों से वित्त पोषित संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्थानों में स्वीकृत 1748 पदों में से 809 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसमें सबसे अधिक बिहार में 228, दिल्ली में 163, उत्तर प्रदेश में 113 पद रिक्त पड़े हैं।



नई दिल्ली, 24 जून (हि.स.)। देश में केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले तमाम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 809 संस्कृत शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि उसने सभी शैक्षणिक संस्थानों में अकादमिक पदों पर रिक्तियों को भरने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सोमवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों से वित्त पोषित संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्थानों में स्वीकृत 1748 पदों में से 809 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसमें सबसे अधिक बिहार में 228, दिल्ली में 163, उत्तर प्रदेश में 113 पद रिक्त पड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी शैक्षणिक संस्थानों में अकादमिक पदों की रिक्तियों को भरने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। वर्तमान में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए अतिथि और अंशकालिक संकाय को रखकर पूरा किया जाता है।
इस संबंध में एक सवाल का जवाब देते हुए निशंक ने कहा कि देश में लगभग 120 विश्वविद्यालय हैं, जिसमें संस्कृत भाषा को एक विषय के तौर पर पढ़ाया जाता है। जबकि 15 संस्कृत विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से तीन केंद्र सरकार और 12 राज्य सरकारों द्वारा वित्तपोषित (डीम्ड) विश्वविद्याल हैं। इन विश्वविद्यालयों से एक हजार पारंपरिक संस्कृत कॉलेजों को मान्यता मिली हुई है और इन कॉलेजों में लगभग 10 लाख छात्र पढ़ रहे हैं।

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