केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के आरक्षित रिक्त पदों पर सरकार को लिखा पत्र

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शिक्षकों ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र लिखकर केंद्रीय विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में विभिन्न स्तरों के शिक्षकों के आरक्षित 5,606 पदों को खाली रखने के कारणों का पता लगाने के लिए एक समिति गठित कर सर्वे कराने की मांग की है।



नई दिल्ली, 02 जून (हि.स.)। शिक्षकों ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र लिखकर केंद्रीय विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में विभिन्न स्तरों के शिक्षकों के आरक्षित 5,606 पदों को खाली रखने के कारणों का पता लगाने के लिए एक समिति गठित कर सर्वे कराने की मांग की है।

ऑल इंडिया यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजिज एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स एसोसिएशन ने रविवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याणार्थ संसदीय समिति, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और यूजीसी को लिखे पत्र में कहा है कि केंद्रीय, राज्य व मानद विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसरों के आरक्षित पदों को नहीं भरने के कारणों का पता लगाने के लिए सरकार एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर सर्वे कराये। साथ ही यह समिति पता लगाएं कि यूजीसी गाइडलाइंस-2006 के लागू होने के बाद से केंद्रीय विश्वविद्यालयों व उससे संबद्ध कॉलेजों ने अभी तक कितने पदों पर इन वर्गों के शिक्षकों की नियुक्ति की है और कितने पद वर्तमान में खाली हैं जिन्हें भरा जाना है।

टीचर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि इस समिति में “मानव संसाधन विकास मंत्रालय, एससी, एसटी के कल्याणार्थ संसदीय समिति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और यूजीसी से एक-एक सदस्य के अलावा सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, सेवानिवृत्त कुलपति, डीओपीटी के अधिकारियों के अतिरिक्त रोस्टर की सही जानकारी रखने वाले प्रतिनिधि को रखा जाएं। उन्होंने समिति में एक सदस्य टीचर्स एसोसिएशन का भी रखने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि यह समिति सर्वे के माध्यम से यह पता लगाएं कि केंद्रीय, राज्य व मानद विश्वविद्यालयों व उससे संबद्ध कॉलेजों ने शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कौन सा रोस्टर लागू किया है। पोस्ट बेस रोस्टर सभी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में 2 जुलाई 1997 से लागू करते हुए रोस्टर रजिस्टर बनाया गया है या नहीं। यूजीसी गाइडलाइंस–2006 को इन विश्वविद्यालयों व कॉलेजों ने लागू करते हुए एससी, एसटी, ओबीसी के शिक्षकों के आरक्षित पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकालकर कितने पदों को भरा। यदि इन पदों को अभी तक नहीं भरा है तो एचआरडी व यूजीसी ने इनके विरुद्ध अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। साथ ही जिन विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व संस्थानों ने आरक्षित पदों को नहीं भरा है उन संस्थाओ का अनुदान रोकने के लिए सरकार ने क्या प्रयास किए हैं।

टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव प्रो. के पी सिंह यादव ने बताया कि पिछले कई वर्षों से 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एक अप्रैल 2018 के अनुसार विभिन्न विभागों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। प्रोफेसर स्वीकृत पद–2,426, एसोसिएट प्रोफेसर–4,805, सहायक प्रोफेसर–9,861 पद हैं। इस तरह से कुल 17,902 पद बनते हैं। इन खाली पड़े पदों में प्रोफेसर–1,301, एसोसिएट प्रोफेसर–2,185, सहायक प्रोफेसर–2,120 पद हैं। कुल 5,606 पद खाली हैं इसमें सबसे ज्यादा एससी, एसटी, ओबीसी शिक्षकों के हैं। इसमें अनुसूचित जाति-873, अनुसूचित जनजाति-493, ओबीसी-786, पीडब्ल्यूडी-264 खाली पदों पर नियुक्ति होनी है लेकिन विश्वविद्यालयों द्वारा लंबे समय से इन पदों को भरा नहीं गया।


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