सीएम से जगी है आस, ना भूख लगे, ना प्यास

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प्रदेश के कोने-कोने से सीएम आवास के पास जुटने लगती है ज्ञापन देने वालों की भीड़



लखनऊ, 01 जून (हि.स.)। डीएम ने नहीं सुनी, खत्म हो गयी भूख-प्यास। सिर पर गठरी लादे, चले आए सीएम आवास।। अधिकारियों के काम में तो बहुत झोल है, सिर्फ सीएम साहब से लगी है आस। जौनपुर से चलकर सुबह पांच बजे सीएम आवास के थोड़ी दूर पर अपना पत्र लिखवाती सुनील गुप्ता की विधवा के मन में आस और आंखों के आंसू देखकर बरबस ही यह कविता फूट पड़ी। इस विधवा की एक लड़की और एक लड़का है। ससुर की मौत दो साल पहले हो गयी। पति की मौत भी एक माह की भीतर उसी समय हो गयी थी। पति के दो भाईयों ने उसके हिस्से की जमीन बेचकर भी मुंबई चले गये। घर भी बेच दिया। विधवा अधिकारियों के यहां गुहार लगाती रही लेकिन सुनवाई नहीं हुई। किसी ने बताया कि सीएम के यहां गुहार लगाने पर काम हो जाएगा तो शनिवार को सुबह ही सीएम आवास पहुंच गयी।
यह अकेले समस्या जौनपुर जिले के मड़ियाहू थाना क्षेत्र के सुदनीपुर गांव की स्वर्गीय सुनील गुप्ता के विधवा का नहीं है। इस तरह के सैकड़ों लोग प्रदेश के कोने-कोने से आकर सुबह से सीएम आवास के अगल-बगल भटकते हुए मिल जाएंगे, जो नौ बजे सीएम आवास पर अपना ज्ञापन इस उम्मीद के साथ देते हैं कि उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। इसके बावजूद कई लोगों की समस्या का तो अधिकारी पोर्टल पर समाधान दिखा देते हैं लेकिन वास्तव में समाधान नहीं होता। ऐसे भी लोग वहां मिल जाएंगे।
यही नहीं समस्याएं भी लोग तरह-तरह की लेकर आते हैं। अब मुड़वारा गांव, जिला बांदा के झुलु बाबा की समस्या को ही देख लीजिए। वे दुर्गा मंदिर पर रहते हैं। उनकी समस्या है कि जंगल में खाना-बनाने के लिए घर नहीं है। वे इस उम्मीद में चले आए कि सीएम भी योगी हैं। इस कारण संत की समस्या पर विचार करेंगे और उन्हें आवास मिल जाएगा। सहारनपुर से आये सुखेल चंद की 10 बिग्घा जमीन चकबंदी में तत्कालीन लेखपाल ने 2013 में दूसरे को दे दी। उनको दो साल बाद जब दूसरा आदमी उस पर कब्जा करने आया तब उन्हें पता चला कि वे भूमिहीन हो गये हैं। अब वे लेखपाल से लेकर जिला अधिकारी तक चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं। सीएम आवास पर इस आस से शनिवार को पहुंचे थे कि उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
रेवसा, थाना राजापुर, जिला सीतापुर के शंकर लाल के बहन की शादी स्माईलपुर में हुई है। उनकी बहन को दहेज के लिए ससुराल वालों ने निकाल दिया। जब वे कई बार थाने पर गये तो वहां 26 जनवरी को सुलह करा दिया गया। फिर ससुराल जाने पर वहां से ससुरालियों ने भगा दिया। अब थाने पर जाने पर वहां से भी भगा दिया जाता है। वे सुबह ही अपनी बहन को लेकर सीएम आफिस के सामने खड़े थे। उन्होंने बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि यहां उनकी सुनवाई होगी।
  सिकंदरा, जिला हाथरस से आयी विधवा सारिका ने बताया कि उनकी दो समस्या है। पहली तो शौचालय और गल्ला नहीं मिलता है। दूसरा उनकी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। कई बार डीएम आवास पर गईं लेकिन उनके समस्या का समाधान नहीं हुआ। वे जनवरी माह में सीएम आवास पर भी आयी थीं लेकिन पढ़ी-लिखी न होने के कारण उनको प्रगति रिपोर्ट का पता नहीं चल पाया। उनके घर भी कोई कर्मचारी या अधिकारी नहीं गया और न ही उनकी जमीन से कब्जा हटवाया गया। इस कारण पुन: एक जून को ज्ञापन देने के लिए आ गयीं।
‘समस्या बताइए, ज्ञापन लिख जाएगा’
सीएम आवास के अगल-बगल कलम और कागज लेकर दर्जन भर से अधिक युवा बैठे रहते हैं। कहीं से कोई आया, सिर्फ अपनी समस्या बताया और उसका ज्ञापन तैयार हो जाता है। इसके बदले वे लोग 20 से 25 रुपये लेते हैं। आपको किस तरह क्या लिखना है। यह भी बताने की जरूरत नहीं है। वे सब कुछ बता देंगे। साथ ही सुनवाई न होने की स्थिति में क्या करना है। इसकी भी सलाह देते रहते हैं।

 


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