डीयू कॉलेजों में एडहॉक सर्विस को लेकर प्रमोशन में अड़चन

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नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की पदोन्नति में एडहॉक सर्विस को नहीं जोड़ने से पदोन्नति के रास्ते एक बार फिर बंद हो गए हैं।

ऐसा ही एक ताजा मामला जाकिर हुसैन कॉलेज से आया है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ मसरूर अहमद बेग ने 17 मई को जारी एक आदेश में स्पष्ट किया कि एडहॉक मामलों पर गठित कमेटी की रिपोर्ट आने तक पदोन्नति में एडहॉक सर्विस शामिल नहीं होगी। पदोन्नति का आधार बिना एडहॉक सेवाओं के पदोन्नति के मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के पूर्व दिशा-निर्देशों का ही पालन किया जाएगा।

पदोन्नति संबंधी मामले में कॉलेज का कहना है कि चूंकि अभी तक एडहॉक मामलों पर गठित कमेटी की रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि एडहॉक सेवाओं को पदोन्नति के मामले में शामिल किया जाए। अतः तब तक जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती वही शिक्षक आवेदन करें जो एडहॉक सेवाओं को उसमें नहीं शामिल करके पदोन्नति चाहते हैं। साथ ही जिन्होंने पहले एडहॉक सेवाओं को शामिल करते हुए पदोन्नति के लिए आवेदन करने के लिए कहा है उनके आवेदन निरस्त माने जाएंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज सुमन का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा पदोन्नति के मामले तथा शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में स्पष्ट नहीं दिखाई पड़ रही है। बार-बार कुछ न कुछ तकनीकी समस्याएं दिखाकर अवरोध उत्पन्न किए जा रहे हैं, जबकि यदि रिपोर्ट नहीं आई है तो बात ना करके पूर्व में एडहॉक सर्विस को शामिल कर पदोन्नति का जो आधार माना गया था उसी आधार पर अग्रिम रिपोर्ट आने तक पदोन्नति क्यों नहीं की जा रही। इसका मतलब है कि विश्वविद्यालय प्रशासन वास्तव में पदोन्नति करना ही नहीं चाहता। जबकि पूर्व में एडहॉक सर्विस शामिल करते हुए पदोन्नति की जा चुकी है ऐसे में पदोन्नति ना करना कानूनी तौर पर अवैध है। उनका कहना है कि यूजीसी के निर्देशों के अनुपालन और आगे दिशा निर्देशों के अनुसार होना चाहिए।


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