राहुल के लिए अमेठी में इस बार कांटे की टक्कर

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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा चुनाव 2019 के अमेठी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बनाम भाजपा की केन्द्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी के बीच दिलचस्प मुकाबला होगा। कटार की तरह जुबान चलाने वाली ईरानी की हर चाल की काट कांग्रेस महासचिव व पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी करेंगी। राहुल पूरे देश में पार्टी का प्रचार करने में व्यस्त हैं, सो प्रियंका गांधी उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी, यूपीए चेयरपरसन सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली सहित पूरे उ.प्र. में चुनाव प्रचार व अन्य प्रबंधन देख रही हैं। इसलिए इस बार अमेठी की चुनावी लड़ाई राहुल गांधी बनाम स्मृति ईरानी के बजाय प्रियंका गांधी बनाम स्मृति ईरानी हो गया है।
2014 के लोकसभा के चुनाव के समय हालात कुछ और थे। उस समय 10 वर्ष के यूपीए शासन के विरोध वाली लहर थी। जिसको हवा देकर भाजपा ने अपने पक्ष में माहौल बना लिया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी को 4,08,651 वोट मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी कुल 3,00,748 वोट हासिल कर पाईं थीं। बसपा उम्मीदवार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह को 57,716 वोट और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कुमार विश्वास को 25,527 वोट मिले थे। राहुल गांधी ने भाजपा की स्मृति ईरानी को 1,07,903 मतों से हराया था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व एआईसीसी सदस्य अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती ने अमेठी में कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी के विरुद्ध उम्मीदवार उतारा था। उसे 57,716 वोट मिले थे। उसने कांग्रेस का वोट काटा था। इस बार बसपा ने यहां से अभी तक किसी को नहीं खड़ा किया है। सपा-बसपा गठबंधन ने आपस में सीटों के बंटवारे की घोषणा के समय अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने की बात कही थी। ऐसे में अमेठी में 2019 में राहुल गांधी को 2014 से अधिक वोट मिलने की संभावना है।
उ.प्र. के पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेन्द्र का कहना है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस 2014 के चुनाव से मजबूत है। उस समय यूपीए सरकार के 10 वर्ष के शासन के बाद चुनाव हो रहा था। इस बार नरेन्द्र मोदी की केन्द्र में पांच साल की सत्ता के बाद चुनाव हो रहा है। जनता मोदी सरकार के वादे जो बाद में जुमले कहे गये और अब तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह कह रहे हैं कि सरकार बनने पर विदेशी बैंकों में जमा कालाधन लाकर हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख देने का वादा भाजपा ने नहीं किया था, इस पर होगा। सरकार के वादा खिलाफी पर होगा। नोटबंदी, बेरोजगारी, किसानों की समस्या, मंहगाई आदि पर होगा। इन मुद्दों पर पर घिरे मोदी ने इस चुनाव को भी हिन्दू-मुस्लिम, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। क्योंकि कोई भी चुनाव जीतने का भाजपा का यह अंतिम ब्रह्मास्त्र है, लेकिन इससे बहुत फर्क नहीं पड़ेगा। जनता अब जागरूक होने लगी है।
उ.प्र. भाजपा नेता प्रत्युष सिंह का कहना है कि भाजपा उम्मीदवार केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भी अमेठी संसदीय क्षेत्र में बीते पांच वर्ष में तरह-तरह के उपक्रम करके अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। साड़ी बांटने से लगायत बीच-बीच में दौरा भी करती रही हैं। कुछ केन्द्रीय योजनाएं भी लाई हैं। इससे उनके वोट कुछ बढ़ सकते हैं, जबकि उ.प्र. के वरिष्ठ पत्रकार नवेन्दु का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी संसदीय क्षेत्र में बसपा व आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी नहीं होने से दलित और मुस्लिम वोट राहुल गांधी की तरफ चले जाएंगे। इसके चलते उनको 2014 से अधिक वोट मिलने की संभावना है। प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिव व पूर्वी उ.प्र. का प्रभारी बनाने का भी असर पड़ेगा। वह इस बार पहले से अधिक मेहनत कर रही हैं और अमेठी व रायबरेली दोनों संसदीय सीटों को संभाल रही हैं। स्थानीय जनता को अब उनमें भविष्य दिखाई दे रहा है। क्योंकि गांधी परिवार का यहां की जनता से पहले से जुड़ाव रहा है। यह जुड़ाव भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी के प्रति नहीं बन पा रहा है। उनको जनता बाहरी मान रही है, जिसकी काट भाजपा नहीं कर पा रही है।


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