ब्रजक्षेत्र: कहीं दोतरफा तो कहीं त्रिकोणीय होगा मुकाबला!

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एटा, 05 अप्रैल (हि.स.)। तीसरे चरण के नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त होते ही ब्रजक्षेत्र में लोकसभा चुनाव में मुकाबले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गयी है। क्षेत्र की आठों लोकसभा सीटों पर कहीं आमने-सामने का तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबला दिख रहा है।
एटा लोकसभा सीट पर गुरुवार को हुए नामांकनों के बाद साफ हो गया है कि मुख्य मुकाबला भाजपा सांसद राजवीरसिंह राजू व सपा-बसपा गठबंधन की ओर से प्रत्याशी देवेन्द्रसिंह यादव के मध्य ही रहेगा। 2014 के लोकसभा चुनावों में भी राजवीर के मुकाबले में देवेन्द्र सिंह ही निकटतम प्रत्याशी रहे थे।
कांग्रेस-जनअधिकार दल के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में जनअधिकार दल से पूर्व मंत्री सूरजसिंह शाक्य व शिवपाल सिंह यादव की प्रसपा की ओर से गुरुवार को डा.रश्मि यादव ने नामांकन कर मुकाबले का एक कोण बनने की कोशिश की है, किन्तु माना जा रहा है कि सूरजसिंह शाक्य भाजपा के जबकि रश्मि यादव सपा के वोट में सेंध लगाने तक ही सीमित रहेंगे। हालांकि प्रसपा प्रत्याशी के समर्थन में पहुंचे सपा के कई दिग्गज रहे नेताओं की उपस्थिति ने अवश्य चौंकाया है। ऐसे नेताओं में विधानपरिषद सभापति रमेश यादव के पुत्र व एटा से सपा विधायक रहे आशीष यादव का नाम प्रमुख है।
दूसरी ओर जनअधिकार पार्टी प्रत्याशी को नाम की घोषणा के साथ ही कांग्रेस के एक घटक का विरोध सहना पड़ा है। रही सही कसर उनके नामांकन के समय पूरी हुई जब उनके नामांकन कराने को पहुंचे एटा के कांग्रेस जिलाध्यक्ष चोबसिंह धनगर व कांसगंज की जिलाध्यक्ष व लोकप्रिय नेता डा. शशिलता चौहान सहित सभी कांग्रेसियों को प्रस्तावक या समर्थक न बनाए जाने के कारण नामांकन स्थल पर बाहर ही खड़ा रहना पड़ा था।
वहीं फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर शिवपाल यादव की घोषणा के अनुरूप नामांकन करने के बाद मुख्य मुकाबला चाचा शिवपाल व भतीजे सांसद अक्षय यादव के मध्य ही होता दिखाई दे रहा है। भाजपा ने यहां जादोन प्रत्याशी उतारकर अच्छा दांव खेला है। क्षेत्र में जादोन मतदाताओं की खासी संख्या के साथ क्षेत्र के सवर्णों, व्यापारियों व अन्य समुदायों के समर्थन से भाजपा की ओर से नामांकन करनेवाले डा. चन्द्रसेन जादौंन दो बिल्लियों की लड़ाई में बंदर की भांति हाथ मार जायं तो आश्चर्य न होगा।
मैनपुरी लोकसभा सीट पर प्रसपा व कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। यहां मुख्य मुकाबला सपा संरक्षक मुलायमसिंह यादव व उनके 2014 में भी निकटतम प्रतिद्वन्द्वी रहे भाजपा के प्रेमसिंह शाक्य के मध्य होगा। क्षेत्र में शाक्य मतदाताओं की अच्छी संख्या को देखते हुए भाजपा की ओर से इन्हें दमदार प्रत्याशी बताया जा रहा है। किन्तु कुश्ती के ‘धोबी पाट’ दांव को राजनीति में सफलतापूर्वक आजमानेवाले मुलायमसिंह यादव जैसे बड़े कद के नेता के सामने प्रेमसिंह पुन: चित होंगे या बिल्ली के भाग्य छीका तोड़ मुलायम को पटखनी देंगे- देखना रोचक रहेगा।
वहीं लोकसभा के दूसरे चरण की ब्रजक्षेत्र की सीटों में आगरा सुरक्षित सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी डा. एसपीसिंह बघेल व गठबंधन की ओर से बसपा प्रत्याशी मनोज सोनी के मध्य ही होता दिख रहा है। यहां कांग्रेस की पूर्व आयकर आयुक्त रही प्रीति हरित ने नामांकन कर एक तीसरा कोण बनाने की कोशिश की है। किन्तु राजनीतिक अनुभवहीनता, क्षेत्र में कमजोर कांग्रेस संगठन व गुटबाजी के चलते वह प्रभावी कोण बना पाएंगी, चुनावों के परिणाम ही फैसला करेंगे।
मथुरा लोकसभा सीट पर यहां की मौजूदा सांसद व सिने तारिका हेमामालिनी के सामने गठबंधन प्रत्याशी के रूप में राष्ट्रीय लोकदल के नरेन्द्रसिंह व कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में महेश पाठक मैदान में हैं। यहां हेमा के समक्ष पार्टी की गुटबाजी, जातीय समीकरण चुनौती है तो मुस्लिमों का एक ओर हो सकनेवाला झुकाव व भाजपा समर्थित ठाकुर मतदाओं को रोके रखना भी बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर आरएलडी प्रत्याशी मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण व जाट-ठाकुर मतदाताओं के भरोसे ही मैदान में हैं। किन्तु उनके सामने समस्या है कि क्षेत्र में जाट व ठाकुरों के मध्य सदैव टकराव व बिखराव ही रहा है। दूसरे इनसे बसपा के आधार अनुसूचित जाति के मतों को जोड़ पाना फिलहाल तो खयाली पुलाव जैसा ही दिखता है। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी ब्राहमणों के झुकाव, कांग्रेस के परम्परागत मतों, मुस्लिम मतों व भाजपा विरोधी मतों के सहारे जीत का सपना संजोये हैं। इनके सामने कांग्रेस की गुटबाजी तो चुनौती है ही, अपने सजातीय व परम्परागत मतों का भाजपा खेमे में न पहुंचने देना भी बड़ी चुनौती है।
हाथरस सुरक्षित सीट पर भाजपा द्वारा अपने वर्तमान सांसद का टिकट काटकर पूर्व सांसद किशनलाल दिलेर के पुत्र व इगलास के वर्तमान भाजपा विधायक राजवीर दिलेर को प्रत्याशी बनाया गया है। राजवीर के सामने गठबंधन प्रत्याशी के रूप में सपा के राष्ट्रीय महामंत्री व फिरोजाबाद से 4 बार सांसद रहे रामजीलाल सुमन मैदान में हैं। यहां कांग्रेस ने इगलास के पूर्व विधायक रहे त्रिलोकीराम दिवाकर को मैदान में उतारा है। त्रिलोकीराम चूंकि कांग्रेस में दल बदलकर आये हैं अतः उनके साथ भितरघात होने की आशंका है। हालांकि हाल ही में राष्ट्रीय लोकदल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए अनिल चौधरी से उन्हें अच्छा समर्थन मिलने की उम्मीद भी है। फिलहाल मुकाबला सपा-भाजपा में आमने-सामने का ही प्रतीत हो रहा है। किन्तु चुनाव की तिथि तक यहां त्रिकोणीय मुकाबला भी देखने को मिल सकता है।
वहीं अलीगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा की ओर से सांसद सतीश गौतम पर ही दोबारा दांव लगाया गया है। इनके प्रतिद्वन्द्वियों में गठबंधन की ओर से बसपा प्रत्याशी अजीत बालियान व कांग्रेस की ओर से 12 चुनावों के अनुभवी पूर्व सांसद विजेन्द्रसिंह मैदान में हैं। भाजपा सांसद का राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के परिवार से कथित विरोध इनके मार्ग की बड़ी बाधा है। हालांकि कल्याण सिंह उनके पक्ष में वक्तव्य देकर अपनी संवैधानिक स्थिति को भी दांव पर लगा चुके हैं। सतीश गौतम की दूसरी बड़ी चुनौती जाट मतों को साधना तथा मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण रोकना भी है। वहीं 2014 के चुनावों में दूसरे क्रमांक पर रहे बसपा के अजीत बालियान ने अगर मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया तथा सपा-बसपा के परम्परागत मतदाता समझे जानेवाले यादव व अनुसूचित मतदाताओं को नहीं बिखरने दिया तो ये भाजपा के समक्ष बड़ी चुनौती प्रस्तुत करेंगे। किन्तु अनुभवी बिजेन्द्र सिंह के कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में सामने होना तथा क्षेत्र के मुस्लिम व अन्य मतदाताओं में लगातार सेंध लगाते रहना बालियान को कमजोर ही करेगा। वहीं बिजेन्द्र के समक्ष भी कांग्रेस गठबंधन पदाधिकारियों के मध्य तालमेल व भाजपा की वाल्मीकि मतदाताओं में सेंधमारी न होने देने की चुनौती रहेगी।
पूरे ब्रजमंडल में कांग्रेस अगर कही स्पष्ट मुकाबले में दिख रही है तो वह है ‘फतेहपुर सीकरी’ यहां कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, सिने अभिनेता व आगरा से सांसद रहे राज बब्बर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। जबकि भाजपा ने सांसद बाबूलाल चौधरी का टिकट काटकर संगठन के राजकुमार चाहर को उतारा है। वहीं सपा-बसपा गठबंधन की ओर से बसपा की पूर्व घोषित प्रत्याशी सीमा उपाध्याय के मैदान से हटने के बाद लाये गये श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित बसपा के वैकल्पिक व बाहरी प्रत्याशी हैं। ऐसे में फतेहपुर सीकरी फतह करने का श्रेय किसके खाते में जाएगा, इसे चुनावों के परिणाम ही बेहतर बता पाएंगे।
कुल मिलाकर 2014 के चुनावों में क्षेत्र की 8 सीटों में से 6 पर फतेह करने वाली भाजपा कड़े संघर्ष के बावजूद प्रत्येक सीट पर मुख्य मुकाबले में होने के कारण फिलहाल तो कुछ खोती नजर नहीं आती। हालांकि सपा-बसपा गठबंधन अपनी सीटों की संख्या दो से अधिक करने तथा अन्य दल अपनी दमदार उपस्थित दर्शाने और अवसर मिले तो एक-आध सीट झपट लेने की फिराक में नजर आ रहे हैं।


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