डीयू में शिक्षकों की नियुक्तियों पर लगा ग्रहण

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नई दिल्ली, 02 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय(डीयू) से सम्बद्ध कॉलेजों में शैक्षिक पदों पर इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि अप्रैल में स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आए 10 प्रतिशत आरक्षण की वजह से शिक्षकों की नियुक्तियों पर ग्रहण लग गया है। ऐसे में कुछ समय के लिए भर्ती प्रक्रिया फिर से टल गई है।
दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने संबंधी कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग(डीओपीटी) का सर्कुलर आया है। इसमें कहा गया है कि इसे लागू करते हुए शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक पदों को भरा जाए। सर्कुलर के आधार पर दिल्ली विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव(भर्ती) ने विभागों और कॉलेजों को सर्कुलर जारी कर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग संबंधी नीति को ध्यान में रखकर उसे सीधी भर्ती में एक फरवरी-2019 से लागू करने का आदेश किया है। डीओपीटी ने इसे फरवरी-2019 से लागू मानने का आदेश दिया है।
प्रो. सुमन ने बताया कि ईडब्ल्यूएस कोटे को संज्ञान में लेते हुए अब विश्वविद्यालय के विभागों व कॉलेजों को एक नए रोस्टर बनाने की आवश्यकता होगी और वह रोस्टर बिना सामने लाए कोई भी नियुक्ति प्रक्रिया संवैधानिक रूप से संभव नहीं है। आरक्षण रोस्टर के अनुसार एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस की सीधी भर्ती के लिए आरक्षण रोस्टर को पुनः संशोधित करके सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करना होगा जो कि आरक्षण रोस्टर के मॉडल में संरक्षित है।
प्रो. सुमन ने रोस्टर रजिस्टर के आधार पर कॉलेजों को रोस्टर को रिकास्ट करके डीयू के एससी, एसटी और ओबीसी के लायजन ऑफिसर से पास कराकर पदों को विज्ञापित किया जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर है कि 10 फीसदी आरक्षण को लागू करके नये आरक्षण रोस्टर को सार्वजनिक किया जाए, रिक्त पदों को घोषित किए जाए उन्हें वेबसाइट पर डाला जाना चाहिए।


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