चंद्रबाबू देश के सबसे घटिया अवसरवादी राजनीतिज्ञ: चंद्रशेखर राव

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हैदराबाद, 29 दिसम्बर (हि.स.)। तेलुगु भाषाई राज्यों की राजनीति शनिवार को एकदम से गरमा गई जब तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के लिए काफी तल्ख शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उनपर घटिया किस्म की राजनीति करने का इल्जाम लगाया। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू को देश का सबसे घटिया और अवसरवादी राजनीतिज्ञ बताते हुए कहा कि वे बड़े झूठे हैं।
बता दें कि चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव के दौरान आरोप लगाए थे कि केसीआर आंध्रप्रदेश को विशेष दर्जा देने के खिलाफ हैं और केंद्र को तेलंगाना ने चिट्ठी लिखी थी। इसपर टिप्पणी करते हुए चंद्रशेखर राव ने कहा कि चंद्रबाबू झूठे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष दर्जा के बदले विशेष पैकेज की मांग करने वाले पहले नेता चंद्रबाबू हैं और वे कैसे दूसरे को अपनी नाकामयाबी के लिए दोषी ठहरा रहे हैं?
उन्होंने चंद्रबाबू के शासनकाल की आलोचना करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ा है और इसबार चुनावों में उनकी हार निश्चित है। चंद्रशेखर राव ने दावा किया कि उनके कल्याणकारी योजनाओं को आंध्रप्रदेश सरकार नकल करके अमल में लाने के लिए जुटी हुई है। उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि ऐसे झूठे राजनीतिज्ञ को प्रोत्साहित करना उचित नहीं है।
चंद्रशेखर राव ने कहा कि हाल ही में वे विशाखापट्टनम के दौरे पर गए और वहां भव्य स्वागत देखकर खुद ही चौक गए। वहां के प्रांतीय नेताओं ने बताया कि कांग्रेस समेत महागठबंधन को हराकर आपने चंद्रबाबू को जो तमाचा मारा है वह हमारे लिए शुभ परिणाम है।
चंद्रबाबू ने कहा था कि केंद्र सरकार ने आंध्रप्रदेश की राजधानी के निर्माण के लिए कुछ भी नहीं दिया। इस संदर्भ में केसीआर ने चंद्रबाबू पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र ने अबतक कुल 1500 करोड़ रुपये राजधानी के निर्माण में दिया है।
कांग्रेस द्वारा तेलंगाना विधानसभा चुनावों में ईवीएम में गड़बड़ी किए जाने के संदेह के संदर्भ में केसीआर ने कहा कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की चुनावी जीत के बावजूद कांग्रेस ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है तो नेतृत्व की परिपक्वता को लेकर संदेह होता है। उनका कहना है कि नतीजे विपरीत आने पर हार को स्वीकार करना जरूरी है।
मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में उन्होंने कहा कि वे सोच- समझकर निर्णय लेंगे और मंत्रिमंडल में अधिकांश चुनाव क्षेत्रों व सभी सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जा रहा है।


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