हेराल्ड हाउस मामला: हाईकोर्ट का अंतरिम राहत देने से इनकार

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नई दिल्ली, 13 नवम्बर (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के हेराल्ड हाउस को टेकओवर करने के केंद्र सरकार के आदेश के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले वह पूरी फाइल को पढ़ेगी । कोर्ट ने इस मामले पर 15 नवंबर को सुनवाई करने का फैसला किया। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने हेराल्ड हाउस खाली करने के लिए 15 नवंबर तक का ही समय दिया है।
एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) ने केंद्र सरकार के 30 अक्टूबर के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। केंद्र सरकार ने पिछले 30 अक्टूबर को हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया था । केंद्र सरकार ने हेराल्ड हाउस का लीज खत्म करने का फैसल किया । याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार का ये फैसला राजनीति से प्रेरित है। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नेहरूवादी नीतियों के विरोध की वजह से ये फैसला लिया गया है।
आपको बता दें कि नेशनल हेराल्ड से संबंधित एक और मामला पटियाला हाउस कोर्ट में चल रहा है। पटियाला हाउस कोर्ट में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर की है। एजेएल नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिकाना कंपनी है । कांग्रेस ने 26 फरवरी 2011 को इसकी 90 करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। इसके बाद पांच लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई। इसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी की 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास है। इसके बाद एजेएल के 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर नयी बनायी कंपनी यंग इंडियन को दे दिए गए। इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 09 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को इस कंपनी के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। यानी यंग इंडियन को एजेएल का स्वामित्व मिल गया।


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