भारत को ईरान से तेल के आयात में छूट

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वॉशिंगटन, 03 जुलाई (हि.स.)। अमेरिका ने भारत सहित कुछेक देशों को ईरान से कच्चे तेल के आयात में कुछ छूट देना स्वीकार कर लिया है। यह छूट कितनी होगी और कब से लागू मानी जाएगी, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

बताया जाता है मूलत: यह छूट एक उस देश को दिए जाने की चर्चा है, जो कालांतर में ईरान पर अपनी तेल की निर्भरता कम करेंगे। भारत अपनी कुल जरूरत का 80 प्रतिशत तेल का आयात करता है।

इसके लिए सऊदी अरब, इराक और ईरान सहित कुछ अन्य देशों से तेल लेता है। चीन के बाद भारत दूसरा देश है, जो ईरान से बड़ी मात्रा में तेल का आयात करता है। इस बार भी छूट सन 2012 में ईरान के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों की तर्ज पर होगी, जिसमें भारत सहित कुछेक देशों को छूट दी गई थी। उस समय भारत को ईरान से करीब अपनी आधी तेल आपूर्ति करने में छूट मिल गई थी। भारत ने उस समय भी कालांतर में तेल के लिए ईरान पर अपनी निर्भरता कम की थी। ईरान 22 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल का उत्पादन करता है। इसमें से चीन 25 प्रतिशत और भारत 18 प्रतिशत तेल का आयात करता है, जबकि टर्की और इटली आदि अन्य देश ईरान से तेल खरीदते हैं।

ट्रम्प प्रशासन ने पिछले ही सप्ताह चेतावनी दी थी कि सरकार उन देशों के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाएगी जो 4 नवम्बर के बाद भी ईरान से ‘शून्य’ स्तर पर संबंध जारी रखेंगे। अमेरिका ने गत मई में छह देशों की एक संयुक्त आणविक संधि कार्यक्रम से पीछे हटने के बाद चेतावनी दी कि अगले छह महीनों की बाद जो भी देश अथवा कंपनी ईरान के साथ व्यापारिक लेन-देन रखेगी, उसके खिलाफ अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा।

अमेरिका ने ईरान को आर्थिक और राजनीतिक ढंग से अलग थलग करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए विदेश विभाग में जॉन हुक के अनुसार वित्त और विदेश विभाग की ओर से कुछेक प्रतिनिधि मंडल यूरोपीय देश जा रहे हैं, जो ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के बारे में उनके वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करेंगे।


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