जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश के रूप में 7 जुलाई को लेंगे शपथ

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पटना, 03 जुलाई (हि.स.)। पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी सात जुलाई को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। चार जुलाई को जस्टिस त्रिपाठी पटना हाईकोर्ट में आखिरी दिन न्यायिक कार्यवाही में भाग लेंगे। इसी दिन पटना हाईकोर्ट प्रशासन और एडवोकेट एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट परिसर में ही उनके सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन अलग-अलग किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक केन्द्रीय विधि व न्याय मंत्रालय ने रविवार को पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी की छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जाने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उनके नाम की अनुशंसा मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए करते हुए केन्द्र सरकार को भेज दिया था। केंद्र सरकार ने करीब छह माह बीत जाने के बाद जस्टिस त्रिपाठी के नाम को राष्ट्रपति के यहां भेजा।

जस्टिस त्रिपाठी बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। 12 नवम्बर 1957 को जन्मे जस्टिस त्रिपाठी ने अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स दिल्ली से पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। वर्ष 1981 में अधिवक्ता के रूप में ये नामित हुए और पटना हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। शुरुआती दिनों में इन्होंने सर्विस, कांस्टीच्यूशनल लॉ, टैक्सेसन, एक्साइज एवं अन्य कमर्शियल वादों में अपनी पैठ बनाई| साथ ही ये केन्द्र सरकार और इनकम टैक्स विभाग के स्टैंडिंग काउंसिल में भी रहे तथा सीबीआई एवं ऑडिटर एवं कंट्रोलर जेनरल ऑफ इंडिया की ओर से पटना हाईकोर्ट में विशेष काउंसिल के रूप में पटना हाईकोर्ट में बिभाग का पक्ष रखा।

केंद्र सरकार के साथ-साथ कई अन्य विभागों के भी लंबे समय तक अधिवक्ता के रूप में हाईकोर्ट में कार्य किया। नौ अक्टूबर 2006 को पटना हाईकोर्ट के एडिशनल जज बने। इसके बाद इन्हें 21 नवम्बर 2007 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। जस्टिस त्रिपाठी की गिनती तेज तर्रार और कानून के उत्कृष्ट जानकार के साथ-साथ उन गिने-चुने न्यायाधीशों में की जाती है। इन्होंने पटना हाईकोर्ट के अपने कार्यकाल में कुछ ऐसे भी निर्णय दिए जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय रहा है। इनके जजमेन्ट को सुप्रीम कोर्ट ने भी सराहा है।

जस्टिस त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल में रिकॉर्ड मामलों का निष्पादन किया है। जानकारी के अनुसार अपने कार्यकाल में इन्होंने 43 हजार से अधिक मामलों का निष्पादन किया है। उनके कार्यकाल के दौरान उनकी एक और खासियत से अधिवक्ताओं को रू-ब-रू होने का मौका मिलता रहा है। नये अधिवक्ताओं को वे काफी बेहतर तरीके से सीखने और आगे बढ़ने का मौका देते रहे हैं।


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