यूपी में मोदी-शाह के लगातार दौरे से विपक्षी परेशान

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नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स.) । प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जिस तरह से उ.प्र. का लगातार दौरा व चुनावी व्यूह रचना शुरू कर दी है , उसके चलते सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद सहित अन्य विपक्षी दल परेशान हो गये हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह 4 व 5 जुलाई 2018 को वाराणसी व मिर्जापुर में प्रवास व पूर्वांचल भाजपा के पदाधिकारियों की बैठकें करेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान वह पटेल व राजभर जाति के मतदाताओं को अपने से छिटकने नहीं देने के उपक्रम के बारे में विचार-विमर्श करेंगे।

अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल व छोटी बेटी पल्लवी पटेल ने सोनेलाल के जन्म दिन पर 3 जुलाई 2018 को वाराणसी में एक बड़ा कार्यक्रम रखा है, जिसमें विपक्षी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया है। यह खेमा अपना दल (एस)का विरोधी है । जिन सीटों पर अपना दल (एस) प्रत्याशी उतारेगा ,उन सीटों पर भी अपना दल प्रत्याशी खड़ा करेगा। शाह इस सबको देखते हुए और सपा – बसपा की संभावित गठजोड़ के मद्दे नजर पूर्वांचल की चुनावी रणनीति पर नये सिरे से विचार करेंगे। इसके बारे में पूर्वांचल के पदाधिकारियों से राय-बात करेंगे। क्योंकि मिर्जापुर ,वाराणसी , आजमगढ़ मंडल में बसपा को सपा से अधिक वोट मिले थे। यदि सपा व बसपा का गठबंधन हो गया ,इसके साथ कांग्रेस भी आ गई, तो पूर्वांचल में भाजपा की लड़ाई बहुत कठिन हो जायेगी।

इधर उ.प्र. के पूर्वांचल पर फोकस कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कुछ दिन पहले संत कबीर दास के जन्म दिन के अवसर पर ,संत कबीर नगर (मगहर) गये थे , जहां कबीर दास मरे थे। उनकी समाधी पर चादर चढ़ाये । वहां उन्होंने कबीर अकादमी ,शोध संस्थान के लिए 24 करोड़ रूपये की परियोजना का शिलान्यास भी किया। वह अब 14 जुलाई 2018 को दिन में आजमगढ़ जायेंगे। वहां से 14 जुलाई की शाम को वाराणसी जायेंगे और दीनदयाल हस्तकला संकुल में प्रबुद्धों , पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे। जहां से वह करोड़ो रूपये की योजनाओं का शिलान्यास , लोकार्पण करेंगे । इसके बाद डीएलडब्लू में रात्रि विश्राम करेंगे। 15 जुलाई को वाराणसी से सटे पश्चिम, राजातालाब में जनसभा को संबोधित करेंगे । वहां से मिर्जापुर जाने की भी चर्चा है।

शाह और मोदी द्वारा अभी से इस धुंआधार दौरे , कार्यक्रम से कुछ विपक्षी दलों को लोकसभा चुनाव कुछ माह पहले कराने की आशंका होने लगी है। इन दोनों नेताओं के तुफानी दौरे ने विपक्षी दलों की नींद हराम कर दी है। इस बारे में गुजरात भाजपा सांसद लाल सिंह बड़ोदिया का कहना है कि नरेन्द्र भाई की चुनावी तैयारी की यह कारपेट बाम्बिंग स्टाइल है। यह करके वह विपक्षी दलों को चुनावी रणक्षेत्र में जाने से पहले ही दहशतजदा कर देते हैं। इसके बाद विपक्षी दलों के बहुत से नेताओं को तोड़कर , उनके सेठों पर लगाम लगाकर कमर तोड़ देते हैं। इस तरह लगभग आधी लड़ाई तो पहले ही जीत लेते हैं। जहां तक उ.प्र. का सवाल है ,तो वहां लोकसभा की सबसे अधिक सीटें 80 हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में वहां से 2014 के चुनाव के बराबर सीटें लाने का दबाव है। इस बार स्थिति व परिस्थिति बदली हुईं हैं। 2014 में यूपीए के 10 साल के राज व उसपर तमाम तरह के आरोपों से ऊबी जनता परिवर्तन चाहती थी। उस बार उ.प्र. में सपा व बसपा ने साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ा था। इस बार यानि 2019 के लोकसभा चुनाव में उ.प्र. में सपा व बसपा के मिलकर लड़ने की संभावना है। यदि बात बनी तो उस गठबंधन में कांग्रेस व रालोद भी शामिल हो जायेंगे। इन चारो दलों को 2014 के लोकसभा चुनाव में जो वोट मिले थे , वे जोड़ने पर बहुत अधिक हो जाते हैं। जो 2014 से बिल्कुल अलग हालात बना देगा। ऐसे में उ.प्र.में भाजपा को 2014 की तुलना में एकजुट विपक्ष से लोहा लेना होगा। इसके मद्देजर ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उ.प्र. में तमाम योजनाओं की , परियोजनाओं की घोषणा करना , आधारशिला रखना ,सघन दौरा करना शुरू कर दिया है। इसी तरह से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी उ.प्र. संगठन को आगामी चुनावों के लिहाज से चाकचौबंद करना शुरू कर दिया है। गुजरात में भी चुनाव के पहले ये दोनों आपसी तालमेल से इसी तरह चुनावी तैयारी करते रहे हैं। पार्टी को इसका लाभ मिलता है।

मोदी व शाह के इस तुफानी दौरे के बारे में उ.प्र. कांग्रेस के पदाधिकारी अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में यदि सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद गठबंधन करके लड़े ,तो पूर्वांचल में भाजपा लगभग साफ हो जायेगी। कई मंत्रियों तक की जमानत जब्त हो सकती है । लगभग यही हालत पश्चिम उ.प्र. व बुंदेलखंड क्षेत्र में भी होगी। यही वजह है कि मोदी व शाह अभी से लगातार दौरा , बैठकें, घोषणाएं ,शिलान्यास ,उद्घाटन , लोकार्पण करते हुए चुनावी अभियान शुरू कर दिये हैं।

 


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