जम्मू-कश्मीर में धारा 35ए को निरस्त करने पर 16 अगस्त तक के लिए सुनवाई टली

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नई दिल्ली, 14 मई (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर में धारा 35ए को निरस्त करने की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई 16 अगस्त तक के लिए टाल दी गई है। सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपल ने कहा कि ये मामला बहुत संवेदनशील है। इसके लिए लिए वार्ताकार नियुक्त किया गया है| संबंधित पक्षकारों से बातचीत चल रही है| इसलिए सुनवाई टाल दी जाए । याचिका में कहा गया है कि धारा 35ए से लैंगिक भेदभाव पैदा होता है। जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि कोर्ट इस मामले को सुनवाई के लिए पांच जजों की संविधान बेंच को सौंप सकती है। याचिका डॉ. चारु वली खन्ना ने दायर की है जो एक कश्मीरी पंडित हैं| उन्होंने अंतर्जातीय विवाह किया है और जम्मू-कश्मीर से बाहर जाकर बस गई हैं। उन्होंने कश्मीर के महाराजा बहादुर के 20 अप्रैल 1927 के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है जिसमें उस महिला का अधिकार खत्म कर देता है जो पत्नी या विधवा होते हुए राज्य छोड़कर बाहर जाकर बस जाती है। पिछले 17 जुलाई 2017 को दिल्ली की एक एनजीओ वी द सिटिजंस द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख रखने से बचने की कोशिश की थी। सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि ये मामला बहुत संवेदनशील है और इस पर बड़ी बहस होनी चाहिए। इसमें संवैधानिक मसले जुड़े हुए हैं इसलिए इसे बड़ी बेंच को सुनवाई के लिए रेफर कर दिया जाना चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में धारा 35ए को असंवैधानिक करार देने की मांग की है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/राधा रमण


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