राज्यसभा में नहीं पेश हो सका वित्त विधेयक

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नई दिल्ली, 15 मार्च (हि.स.)। आंध्र प्रदेश के विभाजन के फैसले और राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर राज्यसभा में आज नौंवे दिन भी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी)सदस्यों द्वारा विरोध जारी रहा तथा दो बार के स्थगन के बाद कार्यवाही अपराह्न तीन बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई । आज सुबह टीडीपी के सदस्य पूर्व मंत्री वाईएस चौधरी ने आंध्र प्रदेश के विभाजन के फैसले को जल्दबाजी में लिया निर्णय बताया तथा पूर्व की मनमोहन सरकार की आलोचना की। इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने तीव्र विरोध व्यक्त किया और टीडीपी एवं कांग्रेस सदस्यों में नोंकझोंक हुई। इस पर सभापति एम. वेंकैया ने कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर उपसभापति ने सार्वजनिक बैंकों के कामकाज पर अल्पकालिक चर्चा शुरू कराने का प्रयास किया लेकिन आंध्र प्रदेश के सदस्य आसन के समीप आकर विरोध व्यक्त करने लगे| तब कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही तीन बजे फिर शुरू होने पर भी अल्पकालिक चर्चा शुरू नहीं हो सकी। सदन में लोकसभा द्वारा कल पारित विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक को रखे जाने का अवसर नहीं आया। उपसभापति पीजे कुरियन ने विरोध कर रहे सदस्यों से कहा कि यदि वित्त विधेयक पर चर्चा नहीं हो पाती है तो इसका दोष उन पर ही लगेगा। सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वित्त विधेयक को बिना चर्चा के पारित नहीं किया जाना चाहिए। सदन में इस पर चर्चा अवश्य होनी चाहिए। इसी दौरान वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सीमा शुल्क में बदलाव संबंधी विधायी प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया। विरोध कर रहे आंध्र प्रदेश के सदस्यों पर उपसभापति की अपील का कोई असर नहीं हुआ तथा कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा की आज सुबह कार्यवाही शुरू होने पर सदन ने पूर्व सदस्य बेगम हमीदा हबीबुल्ला के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।


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