बाल मजदूरी छोड़कर स्कूलों में भर्ती हुए 2 लाख से अधिक बच्चे

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नई दिल्ली, 15 मार्च (हि.स.)। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) के तहत पिछले तीन सालों में दो लाख से अधिक बाल मजदूरी को मजदूरी के चक्र से निजात दिलाकर स्कूलों में दाखिल कराया है। हालांकि 2014-15 में जहां ऐसे छात्रों का आंकड़ा 1 लाख 16 हजार 629 था वहीं 2016-17 में यह घटकर 30 हजार 979 रह गया है। यह जानकारी मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि एनसीएलपी के तहत देशभर के विभिन्न राज्यों में 2014-15 में 1 लाख 16 हजार 629, 2015-16 में 59 हजार 076 और 2016-17 में 30 हजार 979 बाल श्रमिकों को मुख्यधारा में शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 में, 6-14 वर्ष की आयु समूह के सभी बच्चों को स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने का आदेश दिया गया है। आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 4 में स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रावधान है। स्कूल में कभी भी नामांकित नहीं हुए अथवा स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ने के कारण कई वर्ष की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त न करने वाले बच्चों को आवासीय और गैर-आवासीय पद्धति में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है। परिणाम स्वरूप उन्हें औपचारिक स्कूलों में उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में प्रवेश देकर मुख्यधारा में लाया जाता है। उन्होंने बताया कि श्रम और रोजगार मंत्रालय, मजदूरी के काम से निकाले गए बच्चों के पुनर्वास के लिए राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) योजना को कार्यान्वित कर रहा है। इस योजना के तहत, 9 से 14 साल के आयु समूह के बचाये गए व मजदूरी के काम से निकाले गए बच्चों को एनसीएलपी विशेष प्रशिक्षण केन्द्रों में नामांकित किया जाता है जहां उन्हें ब्रिज एजुकेशन, व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली उपलब्ध कराई जाती है। सर्व शिक्षा अभियान के साथ समन्वय के माध्यम से 5-8 वर्ष के आयु समूह के बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली से सीधे जोड़ा गया है।


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