उत्तराखंड के सीमांत जिलों चमोली और पिथौरागढ़ में सैन्य गतिविधियां तेज

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आईटीबीपी ने भी अग्रिम चौकियों पर तैनात हिमवीरों को किया अलर्ट



देहरादून, 17 जून (हि.स.)। लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद उत्तराखंड के सीमांत जिलों चमोली और पिथौरागढ़ में भी सैनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नीति-माणा दर्रों व अग्रिम चौकियों पर सैनिकों का जमावड़ा है। आईटीबीपी ने भी अग्रिम चौकियों मे तैनात हिमवीरों को अलर्ट मोड पर रखा है।

चीन की गतिविधि बढ़ने के बाद अब भारतीय सेना ने भी अपनी सीमा पर चौकसी के लिए सीमा क्षेत्र में फ़ौज की और अधिक टुकड़ियों को भेजना शुरू कर दिया है। चमोली जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी भारतीय सेना ने गतिविधि बढ़ रही है और प्रतिदिन फ़ौज की टुकड़ियां रवाना हो रही हैं। ताकि सीमा क्षेत्र में आने वाली हर समस्या से निपटा जा सके। हालांकि अभी सेना व प्रशासन की ओर से सीमावर्ती गांव के बाशिंदों को किसी भी प्रकार का कोई निर्देश जारी नहीं किया है। सीमावर्ती गांव सुकी भलगांव के प्रधान लक्ष्मण बुटोला का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र में सेना की गतिविधि तो बढ़ी है लेकिन स्थानीय निवासियों को अभी कोई निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
उधर, पिथौरागढ़ में धारचूला से लगी चीन सीमा पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है। आज सुबह से ही सीमा पर सेना की हलचल बढ़ गयी है। हालांकि अभी यहाँ ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है लेकिन एहतियातन चीन सीमा पर तैनात आईटीबीपी और सेना ने गश्त बढ़ा दी है। लद्दाख की घटना से सीमांत क्षेत्र के लोगों में भी तीखा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों ने भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए चीन के इस कदम की कड़ी निंदा की है। साथ ही उसे सबक सिखाने की बात भी कही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारतीय सेना को चीन की हर हिमाकत का उसके ही शब्दों में जवाब देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि चीनी सेना धारचूला से लगी सीमा पर भी कई बार अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर चुकी है। तब यहां तैनात जवानों ने चीनी सैनिकों को लौटने को मजबूर कर दिया था।

 


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