छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन पर सख्त कानून, ‘मास कन्वर्जन’ पर उम्रकैद तक की सजा
khabarworld 20/03/2026 0
रायपुर – छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को धर्म परिवर्तन से जुड़ा नया कानून पास किया। सरकार ने इस कदम को अवैध धर्मांतरण पर रोक के लिए जरूरी बताया। वहीं, इस फैसले ने राजनीतिक बहस भी तेज कर दी। नए कानून में सख्त प्रावधान शामिल हैं, जिनमें कुछ मामलों में उम्रकैद तक की सजा तय की गई है।
सबसे पहले, गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन में विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि राज्य को मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है। हालांकि, विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस विधायकों ने विधेयक को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की। लेकिन स्पीकर ने यह मांग खारिज कर दी। इसके बाद विपक्ष ने वॉकआउट किया। अंततः सदन ने विधेयक पारित कर दिया।
नया कानून, छत्तीसगढ़ सरकार ने धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, 2026, धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। कोई भी व्यक्ति अगर धर्म बदलना चाहता है, तो उसे पहले जिला प्रशासन को सूचना देनी होगी। उसे जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अधिकारी के पास घोषणा पत्र जमा करना होगा। इसके बाद अधिकारी सात दिन के भीतर इस जानकारी को सार्वजनिक करेंगे।
इसके साथ ही, प्रशासन स्थानीय स्तर पर नोटिस जारी करेगा। यह नोटिस तहसील, ग्राम पंचायत और थाने में लगाया जाएगा। इसमें व्यक्ति का नाम, वर्तमान धर्म और प्रस्तावित धर्म दर्ज होगा। इसके बाद 30 दिन के भीतर कोई भी आपत्ति दर्ज कर सकता है। फिर अधिकारी जांच करेंगे और तय समय में फैसला सुनाएंगे।
इसके अलावा, कानून प्रशासन को व्यापक अधिकार देता है। अधिकारी रिकॉर्ड मंगा सकते हैं, जांच कर सकते हैं और शिकायतों पर कार्रवाई कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मानते हैं।
विवाह से जुड़े मामलों पर भी कानून ने स्पष्ट रुख अपनाया है। केवल शादी को धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा। लेकिन अगर कोई व्यक्ति सिर्फ शादी के लिए धर्म बदलता है, तो इसे अवैध माना जा सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में 60 दिन पहले सूचना देना जरूरी होगा। अधिकारी जांच करेंगे कि धर्म परिवर्तन कानूनी नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
साथ ही, धर्म परिवर्तन कराने वाले पुजारी या मौलवी को भी जानकारी देनी होगी। उन्हें संबंधित व्यक्ति की मंशा का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके अलावा, जो लोग धर्म परिवर्तन में मदद करते हैं, उन्हें सालाना रिपोर्ट देनी होगी। इसमें कुल मामलों की संख्या और वित्तीय जानकारी शामिल होगी।
कानून फंडिंग पर भी नजर रखता है। अगर कोई संस्था नियमों के खिलाफ धन का उपयोग करती है, तो सरकार उसकी सहायता रोक सकती है। साथ ही, ऐसे फंड को प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।
ग्राउंड एंगल: जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया
जमीन पर इस कानून को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे जरूरी कदम मानते हैं। उनका कहना है कि इससे धोखे या दबाव में होने वाले धर्म परिवर्तन रुकेंगे। कई स्थानीय नेताओं ने भी इस कानून का समर्थन किया है।
दूसरी ओर, कुछ लोगों ने चिंता जताई है। वे कहते हैं कि इससे निजी फैसलों पर निगरानी बढ़ेगी। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे निजता के अधिकार से जोड़ा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक नोटिस से सामाजिक दबाव बढ़ सकता है।
कानूनी विशेषज्ञ भी सतर्क नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस कानून से अदालतों में मामलों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही, प्रशासन के लिए इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बैकग्राउंड: पुराने कानून से सख्त ढांचे की ओर बदलाव
यह नया कानून पुराने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 की जगह लेगा। पहले का कानून धर्म परिवर्तन के बाद सूचना देने की बात करता था। उसमें सजा भी अपेक्षाकृत हल्की थी।
अब नया कानून सख्त सजा तय करता है। “मास कन्वर्जन” यानी एक साथ दो या अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन, गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की सजा होगी। यह सजा उम्रकैद तक बढ़ सकती है। साथ ही भारी जुर्माना भी लगेगा।
अगर पीड़ित महिला, नाबालिग या कमजोर वर्ग से है, तो सजा और कड़ी होगी। ऐसे मामलों में 20 साल तक की सजा हो सकती है। कानून पीड़ितों को मुआवजा देने का भी प्रावधान रखता है।
देश के अन्य राज्यों में भी ऐसे कानून लागू हैं। कुछ राज्यों में पहले से सूचना देना जरूरी है। छत्तीसगढ़ ने अब इसी दिशा में और सख्त कदम उठाया है।
अंत में, यह कानून राज्य की नीति में बड़ा बदलाव दिखाता है। सरकार इसे नियंत्रण और पारदर्शिता के लिए जरूरी बताती है। वहीं, विरोधी इसे अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। आने वाले समय में इसका असर जमीन पर साफ दिखाई देगा।
