पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, पीएम मोदी ने कूटनीति तेज की, ऊर्जा हमलों पर सख्त रुख

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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, पीएम मोदी ने कूटनीति तेज की, ऊर्जा हमलों पर सख्त रुख

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कूटनीतिक पहल तेज की। उन्होंने कई देशों के नेताओं से बात की। उन्होंने बढ़ते ईरान युद्ध पर चिंता जताई। साथ ही, उन्होंने ऊर्जा ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने तुरंत संवाद से तनाव घटाने की अपील की।

सबसे पहले, मोदी ने तमीम बिन हमद अल थानी  से बात की। उन्होंने कतर के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने भारतीय समुदाय को मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। इसके बाद, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।

इसके बाद, मोदी ने अब्दुल्ला द्वितीय से संपर्क किया। उन्होंने ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। फिर, उन्होंने क्षेत्र की बदलती स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने साफ कहा कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले तनाव बढ़ाते हैं। उन्होंने सामान और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने फंसे भारतीयों की वापसी में जॉर्डन की मदद की सराहना की।

इसी दौरान, मोदी ने इमैनुएल मैक्रॉन से भी बात की। उन्होंने तुरंत तनाव घटाने पर जोर दिया। उन्होंने कूटनीति को ही समाधान बताया। मैक्रों ने भी इस रुख का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने मिलकर स्थिरता बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई।

इसके बाद, मोदी ने हैथम बिन तारिक से बातचीत की। उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने ओमान की संप्रभुता के सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने लोगों की सुरक्षित वापसी में ओमान की भूमिका की सराहना की। दोनों पक्षों ने संवाद को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई।

इसके अलावा, मोदी ने अनवर इब्राहिम से भी बात की। उन्होंने त्योहार की शुभकामनाएं दीं। फिर, उन्होंने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने शांति और स्थिरता के लिए कूटनीति का समर्थन किया।

ग्राउंड एंगल: ज़मीन पर बढ़ी चिंता, भारतीयों और तेल आपूर्ति पर असर

जमीन पर चिंता लगातार बढ़ रही है। खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वे स्थानीय प्रशासन और दूतावास के संपर्क में हैं। जरूरत पड़ने पर निकासी की तैयारी भी जारी है। जॉर्डन और ओमान जैसे देश इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।

दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार दबाव में दिख रहे हैं।होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जोखिम बढ़ा है। अगर आपूर्ति बाधित होती है, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत में ईंधन और रोजमर्रा के खर्च पर पड़ सकता है। इसलिए, क्षेत्र की स्थिरता सीधे आम लोगों से जुड़ी है।

बैकग्राउंड: ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से बढ़ा संकट

तनाव तब और बढ़ा जब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया। ये हमले इजराइल के उस हमले के बाद हुए, जिसमें साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया गया। यह दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में शामिल है। यह ईरान की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। दरअसल, ईरान की करीब 80% बिजली प्राकृतिक गैस से आती है।

इसी बीच, डोनाल्ड ट्रम्प  ने कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हमले जारी रहे तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर रोक की बात दोहराई।

कुल मिलाकर, हालात तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में भारत संतुलित रुख अपना रहा है। मोदी की पहल साफ संदेश देती है। भारत शांति, संवाद और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति को प्राथमिकता देता है।


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