नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया। उसने विक्रम दोरैस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया। यह कदम ऐसे समय आया, जब भारत और चीन कई जटिल मुद्दों को संभाल रहे हैं।
सबसे पहले, सरकार ने अनुभव को प्राथमिकता दी। दोराईस्वामी 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं। अभी वे यूनाइटेड किंगडम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब वे बीजिंग में नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
इसके बाद, उनका करियर विविध रहा है। उन्होंने बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में काम किया। साथ ही, उन्होंने कोरिया गणराज्य और उज्बेकिस्तान में राजदूत की भूमिका निभाई। इससे उन्हें एशियाई कूटनीति की गहरी समझ मिली।
इसके अलावा, उन्होंने पहले भी चीन में चार साल तक काम किया। इस अनुभव ने उन्हें स्थानीय हालात और नीति ढांचे को समझने में मदद दी। यही अनुभव अब उनके काम आएगा।
फिर, उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के साथ भी काम किया। वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (भाजपा) और मनमोहन सिंह (कांग्रेस) के निजी सचिव रहे। इस दौरान उन्होंने नीति निर्माण और रणनीतिक फैसलों को करीब से देखा।
जमीनी स्तर पर यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है। सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में सरकार को एक अनुभवी और संतुलित राजनयिक की जरूरत थी। दोराईस्वामी संवाद के जरिए तनाव कम करने की दिशा में काम कर सकते हैं।
हाल के वर्षों में भारत-चीन संबंधों में उतार-चढ़ाव दिखा। दोनों देश सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखते हैं। साथ ही, आर्थिक संबंध भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
अंत में, यह फैसला साफ संकेत देता है। भारत सख्ती और संवाद दोनों को साथ लेकर चलना चाहता है। अब दोराईस्वामी के सामने चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है, और उनसे ठोस नतीजों की उम्मीद भी।