5 राज्यों के चुनाव से पहले EC का भरोसा, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान पर जोर

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देश में चुनावी माहौल तेज हो जाता है। सबसे पहले, भारत निर्वाचन आयोग पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा करता है। इसके साथ ही, आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान का भरोसा देता है।

इसी क्रम में, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार साफ संदेश देते हैं। वह कहते हैं कि आयोग किसी भी तरह की हिंसा, दबाव या लालच को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। वह यह भी जोड़ते हैं कि हर मतदाता बिना डर और बिना पक्षपात के वोट डाल सके, यही प्राथमिकता रहेगी।

दूसरी ओर, चुनावी राज्यों में हलचल बढ़ती है। असम, केरल, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल राज्य और पुदुचेरी  में प्रशासन तैयारियों को तेज करता है। अधिकारी सुरक्षा और व्यवस्था पर खास ध्यान देते हैं।

ग्राउंड पर, चुनावी माहौल सक्रिय दिखता है। राजनीतिक दल रैलियां और बैठकों को तेज करते हैं। कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क बढ़ाते हैं। वहीं, सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में निगरानी मजबूत करते हैं।

इसके साथ ही, आयोग सख्त निर्देश जारी करता है। वह प्रशासन को साफ कहता है कि कोई भी हिंसा, डराने-धमकाने या अवैध वोटिंग नहीं होनी चाहिए। वह बूथ कैप्चरिंग और “चप्पा वोटिंग” जैसे तरीकों पर पूरी तरह रोक लगाने पर जोर देता है।

आगे बढ़ते हुए, आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाता है। वह कई अधिकारियों का तबादला करता है। इसमें पुलिस अधीक्षक, जिला मजिस्ट्रेट और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। इस कदम से चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत करने की कोशिश होती है।

साथ ही, आयोग बड़ी संख्या में पर्यवेक्षक तैनात करता है। कुल 1,100 से अधिक केंद्रीय पर्यवेक्षक राज्यों में पहुंचते हैं। ये अधिकारी हर चरण की निगरानी करते हैं और नियमों के पालन को सुनिश्चित करते हैं।

पृष्ठभूमि में, कुछ राजनीतिक दल आयोग पर सवाल उठाते हैं। खासकर  तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आलोचना करते हैं। वे आरोप लगाते हैं कि आयोग केंद्र सरकार के पक्ष में झुकाव दिखाता है।

हालांकि, आयोग इन आरोपों से प्रभावित नहीं होता। वह साफ कहता है कि उसका कोई राजनीतिक पक्ष नहीं है। उसका लक्ष्य केवल संविधान के अनुसार निष्पक्ष चुनाव कराना है।

इस बीच, विशेषज्ञ भी पुराने अनुभवों का जिक्र करते हैं। वे बताते हैं कि पहले कुछ ईमानदार अधिकारियों को सजा मिली, जबकि पक्षपाती अधिकारियों को लाभ मिला। इसी वजह से इस बार आयोग सख्त रुख अपनाता है।

कुल मिलाकर, चुनाव से पहले तैयारियां पूरी गति से चलती हैं। आयोग सख्ती, निगरानी और पारदर्शिता पर जोर देता है। अब सभी की नजर इस पर टिकी है कि क्या ये कदम जमीन पर पूरी तरह लागू हो पाते हैं और मतदाता स्वतंत्र रूप से अपने अधिकार का उपयोग कर पाते हैं।


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