शेयर बाजार गुरुवार को दबाव में खुलता है और गिरावट तेजी से बढ़ती है। सबसे पहले, तीन दिन की तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली शुरू करते हैं। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल चिंता बढ़ाता है। नतीजतन, शुरुआती कारोबार में बिकवाली हावी रहती है।
इसी क्रम में, BSE सेंसेक्स करीब 2,000 अंक टूटकर नीचे आता है। वहीं, NSE निफ्टी भी 500 अंकों से ज्यादा गिरता है। दोनों सूचकांक बाजार में कमजोर रुख दिखाते हैं और निवेशकों का भरोसा डगमगाता है।
दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचता है। यह उछाल भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता बढ़ाता है। तेल महंगा होने से महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ता है।
ग्राउंड पर हालात तनावपूर्ण दिखते हैं। ट्रेडिंग फ्लोर पर निवेशक स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखते हैं। बैंकिंग, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में तेज बिकवाली दिखती है। कई निवेशक जोखिम घटाने के लिए तेजी से सौदे काटते हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है और सतर्कता हावी रहती है।
इसके अलावा, विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकालते हैं। एफआईआई बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, जिससे दबाव और बढ़ता है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक खरीदारी करते हैं। फिर भी, उनकी खरीदारी बाजार को संभाल नहीं पाती।
इसी बीच, कुछ बड़े शेयरों में खास गिरावट दर्ज होती है। HDFC बैंक तीन प्रतिशत से ज्यादा टूटता है। चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे से निवेशकों में चिंता बढ़ती है। साथ ही, लार्सन एंड टुब्रो, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे शेयर भी गिरते हैं।
वैश्विक संकेत भी बाजार पर दबाव डालते हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट दिखती है। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग के सूचकांक नीचे आते हैं। इससे घरेलू बाजार का मूड और कमजोर होता है।
पृष्ठभूमि में, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव बड़ा कारण बनता है। ऊर्जा ढांचे पर हमलों की खबरें आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाती हैं। इसलिए, निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हैं और इक्विटी से दूरी बनाते हैं।
विशेषज्ञ साफ संकेत देते हैं कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 110 डॉलर से ऊपर रहता है, तो भारत की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और विकास पर दबाव आएगा।
हालांकि, एक दिन पहले बाजार में तेजी दिखी थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अच्छी बढ़त दर्ज की थी। लेकिन, नए वैश्विक संकेतों ने यह बढ़त जल्दी खत्म कर दी।
कुल मिलाकर, कई कारक एक साथ असर डालते हैं। कच्चे तेल की तेजी, वैश्विक कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार को नीचे खींचती है। आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, और निवेशक हर वैश्विक संकेत पर नजर बनाए रखते हैं।