शिक्षा के साथ संस्कार देने वाली हो हमारी शिक्षा प्रणाली -बनवीर सिंह

0
PHOTO-2026-03-18-15-54-36

जालंधर – आरएसएस के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर सिंह ने शिक्षा प्रणाली पर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम बने। उन्होंने यह बात सेंट सोल्जर कैंपस, सूरानस्सी के लॉ ऑडिटोरियम में कही।

सबसे पहले, उन्होंने ‘भारतीय शिक्षा दृष्टि’ को समझाया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टि शिक्षा को संस्कृति, मूल्यों और राष्ट्रहित से जोड़ती है। साथ ही, यह छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़कर आगे बढ़ने की दिशा देती है।

इसके बाद, उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह नीति रटने की बजाय कौशल और मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर देती है। इसलिए, यह छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देती है। इससे युवा अपनी विरासत पर गर्व करते हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होते हैं।

इसी क्रम में, उन्होंने फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि वहां शिक्षा जीवन में सफल होने के लिए दी जाती है, सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं। इसलिए, भारत को भी जीवन-केंद्रित शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

जमीनी स्तर पर, उन्होंने परिवार की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि घर ही बच्चों को सही-गलत का फर्क सिखाता है। वहीं, परिवार साहस, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित करता है। इस प्रकार, शिक्षा और परिवार मिलकर मजबूत व्यक्तित्व बनाते हैं।

इसके साथ ही, उन्होंने नई और पुरानी पीढ़ी के बीच संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संवाद से समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है। साथ ही, यह व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र को मजबूत करता है। धीरे-धीरे, इससे श्रम के प्रति सम्मान और मूल्यों के प्रति आस्था विकसित होती है।

दूसरी ओर, उन्होंने युवाओं को बुराइयों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सही दिशा दिखाना है। इसलिए, स्कूल और समाज दोनों को मिलकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना चाहिए।

उन्होंने ‘धर्म’ की भूमिका भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि धर्म का मतलब सही मूल्यों के साथ जीवन जीना है। इसलिए, यह शिक्षा के जरिए अगली पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

आगे, उन्होंने मातृभाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा से जुड़ाव आत्मसम्मान बढ़ाता है। साथ ही, यह संस्कृति और परंपराओं को मजबूत करता है। इससे एक सभ्य और जागरूक समाज बनता है।

महत्वपूर्ण रूप से, उन्होंने शिक्षा को केवल कमाई का साधन मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य जिम्मेदार नागरिक बनाना होना चाहिए। इससे देश का समग्र विकास संभव होता है।

पृष्ठभूमि में, उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 1987 में गुरुनानक देव विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्हें जीवन के कई महत्वपूर्ण पाठ मिले।

कार्यक्रम की शुरुआत में, ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रो. मनहर अरोड़ा ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इनमें मनीष शर्मा, मनदीप तिवारी, करमजीत परमार, करणवीर, विष्णु दत्त, दीपक गुप्ता, सुखदेव वशिष्ठ और रमेश अरोड़ा शामिल रहे।

अंत में, बनवीर सिंह ने साफ कहा कि शिक्षा में संस्कार जरूरी हैं। तभी देश आत्मनिर्भर, सक्षम और समृद्ध बन सकता है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *