एनआईए की कार्रवाई पर कूटनीतिक तनाव, यूक्रेन ने जताया विरोध, अमेरिका ने कहा—मामले से अवगत
नई दिल्ली – भारत में विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद कूटनीतिक हलचल तेज हो गई। यूक्रेन ने इस कार्रवाई पर औपचारिक विरोध दर्ज किया। वहीं अमेरिका ने मामले की जानकारी होने की बात कही, लेकिन विस्तार से टिप्पणी नहीं की।
सबसे पहले, NIA ने 13 मार्च को बड़ा ऑपरेशन चलाया। एजेंसी ने दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया। साथ ही कोलकाता एयरपोर्ट से मैथ्यू वैनडाइक को पकड़ा। इसके बाद अदालत ने सभी सातों आरोपियों को 27 मार्च तक एनआईए हिरासत में भेजा।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। फिर वे गुवाहाटी पहुंचे और आगे मिजोरम गए। वहां से उन्होंने बिना अनुमति म्यांमार में प्रवेश किया। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने वहां जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया।
इसके साथ ही एनआईए ने जांच का दायरा बढ़ाया। एजेंसी अब आठ और यूक्रेनी नागरिकों की तलाश कर रही है। कुल 15 लोगों के नेटवर्क की आशंका जताई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि ये समूह भारत विरोधी उग्रवादी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।
पूछताछ के दौरान एजेंसी को अहम सुराग मिले। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने कई बार प्रशिक्षण देने की बात स्वीकार की। उन्होंने यूरोप से ड्रोन मंगाकर म्यांमार तक पहुंचाने का भी जिक्र किया। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई।
कानूनी स्तर पर एनआईए ने सख्त धाराएं लगाईं। उसने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। यह कानून आतंकी साजिश और सहयोग जैसे मामलों पर लागू होता है। एजेंसी ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
दूसरी ओर, यूक्रेन ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने तत्काल रिहाई और काउंसुलर एक्सेस की मांग रखी। यूक्रेन ने यह भी कहा कि उसके दूतावास को आधिकारिक सूचना नहीं मिली।
साथ ही यूक्रेन ने एक और मुद्दा उठाया। उसने कहा कि भारत में कई प्रतिबंधित क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान नहीं होती। इससे विदेशी नागरिक अनजाने में नियम तोड़ सकते हैं। इस तर्क ने मामले को और जटिल बना दिया।
वहीं अमेरिका ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उसने कहा कि वह मामले से अवगत है। हालांकि, उसने अपने नागरिक को लेकर गोपनीयता का हवाला देते हुए विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
जमीनी स्तर पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। मिजोरम और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। सीमा पार गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। साथ ही जब्त मोबाइल उपकरणों को जांच के लिए भेजा गया है, ताकि नेटवर्क का पूरा खुलासा हो सके।
पृष्ठभूमि: संवेदनशील सीमा और बढ़ती चुनौतियां
भारत-म्यांमार सीमा लंबे समय से संवेदनशील रही है। इस क्षेत्र में कई उग्रवादी समूह सक्रिय हैं। इनमें से कुछ संगठन भारत में प्रतिबंधित हैं। ऐसे में बाहरी मदद और तकनीकी प्रशिक्षण सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता है।
इसी वजह से एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं। अब जांच का फोकस पूरे नेटवर्क को उजागर करना है। आने वाले दिनों में यह मामला सुरक्षा और कूटनीति दोनों के लिए अहम परीक्षा बन सकता है।
