“हमें किसी की जरूरत नहीं”: डोनाल्ड ट्रम्प का सख्त संदेश, होरमुज़ मिशन पर सहयोगियों ने ठुकराया साथ

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया। सहयोगी देशों के इनकार के बाद उन्होंने नाराज़गी जताई। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका अकेले ही होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा कर सकता है। साथ ही उन्होंने पुराने सहयोगियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।

सबसे पहले, ट्रंप ने सहयोगियों की प्रतिक्रिया पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी की मदद नहीं चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। इसके बाद उन्होंने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन  पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई सदस्य जिम्मेदारी से बचते हैं।

दरअसल, दो दिन पहले ट्रंप ने देशों से अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वे होरमुज़ में युद्धपोत भेजें। फिर सोमवार को उन्होंने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर सहयोग नहीं मिला, तो गठबंधन पर असर पड़ेगा। हालांकि, जर्मनी, स्पेन और इटली ने तुरंत मना कर दिया। इन देशों ने साफ कहा कि वे अभी नौसेना नहीं भेजेंगे।

इसी बीच, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जर्मनी से पहले सलाह नहीं ली गई। उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी मंजूरी नहीं मिली। इसलिए जर्मनी कोई सैन्य कदम नहीं उठाएगा।

इसके बाद, ट्रंप ने फ्रांस को लेकर उम्मीद जताई। लेकिन तुरंत उन्होंने अपना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी मदद की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह अपील एक तरह की परीक्षा भी थी। वह देखना चाहते थे कि संकट में कौन साथ देता है।

आगे, ट्रंप ने यूनाइटेड किंगडम (UK) पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ब्रिटेन ने एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने से इनकार किया। बाद में उसने मदद की पेशकश की। लेकिन तब तक हालात बदल चुके थे। ट्रंप ने कहा कि समय पर सहयोग ही मायने रखता है।

जमीनी हालात तेजी से बदल रहे हैं। ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य पर दबाव बढ़ाया। इस मार्ग से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। इसलिए हर घटना का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। हाल में कई जहाजों पर हमले हुए। इसके बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं।

इस संकट की जड़ फरवरी के अंत में दिखती है। तब अमेरिका और इसराइल  ने ईरान पर हमले शुरू किए। इन हमलों ने सैन्य ढांचे को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए। उसने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया।

इसके साथ ही ईरान ने होरमुज़ को बंद करने की चेतावनी दी। उसने कहा कि वह तेल आपूर्ति रोक सकता है। उसने यह भी संकेत दिया कि कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है।

इस बीच, ट्रंप ने बार-बार नौसेना तैनात करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाज व्यापारिक पोतों को सुरक्षा देंगे। उन्होंने सहयोगियों से साथ देने को कहा। लेकिन ज्यादातर देशों ने दूरी बनाई।

अब यह स्थिति एक बड़े मतभेद को दिखाती है। एक ओर अमेरिका आक्रामक रुख अपनाता है। दूसरी ओर उसके सहयोगी सतर्क रणनीति चुनते हैं। यही अंतर अब इस संकट को और जटिल बना रहा है।


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