सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ सप्ताह की शुरुआत की। प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 400 अंकों से अधिक चढ़ गया। इसके साथ ही NSE Nifty 50 में भी तेज बढ़त दिखाई दी। दिलचस्प बात यह रही कि यह उछाल ऐसे समय आया जब पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़ा युद्ध वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
हालांकि निवेशकों ने फिलहाल जोखिम से ज्यादा अवसर पर ध्यान दिया। पिछले सप्ताह बाजार में आई तेज गिरावट के बाद कई निवेशक फिर से खरीदारी के लिए लौटे। इसी वजह से सोमवार को बाजार में मजबूत रिकवरी दिखाई दी।
पिछले हफ्ते की गिरावट के बाद खरीदारी
दरअसल पिछले सप्ताह शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी। निफ्टी लगभग 5.3 प्रतिशत टूट गया था। वहीं सेंसेक्स में करीब 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी। यह गिरावट निफ्टी के लिए 2022 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही, जबकि सेंसेक्स के लिए 2020 के बाद की सबसे तेज गिरावट मानी गई।
ऐसे में कई निवेशकों ने गिरावट को अवसर के रूप में देखा। उन्होंने उन कंपनियों के शेयर खरीदने शुरू किए जिनकी कीमतें हाल की गिरावट के बाद सस्ती हो गई थीं। आमतौर पर बाजार में तेज गिरावट के बाद इस तरह की खरीदारी देखने को मिलती है। इसलिए सोमवार की तेजी में इसी फैक्टर ने अहम भूमिका निभाई।
भारत-ईरान बातचीत से बाजार को राहत
इसके अलावा एक और खबर ने बाजार के माहौल को थोड़ा सकारात्मक बनाया। भारत और ईरान के बीच समुद्री मार्ग को लेकर बातचीत आगे बढ़ती दिखाई दी।
विदेश मंत्री स जयशंकर ने बताया कि भारत सीधे Iran से बातचीत कर रहा है ताकि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर सामान्य हो सके। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत से कुछ सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।
उनके मुताबिक कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकालना सैन्य दबाव से ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इस बयान ने बाजार में कुछ हद तक भरोसा बढ़ाया।
एलपीजी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही
इसी बीच एक और घटनाक्रम ने सप्लाई से जुड़ी चिंताओं को थोड़ा कम किया। भारत के झंडे वाले दो एलपीजी जहाज हाल ही में सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरकर भारत की ओर बढ़े। इन जहाजों में लगभग 92,700 टन गैस लदी हुई थी।
रिपोर्टों के अनुसार ये जहाज जल्द ही मुंद्रा पोर्ट और कांडला बंदरगाह पहुंच सकते हैं। इससे यह संकेत मिला कि ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं हुई है।
हालांकि भारत ने ईरान के साथ जहाजों की आवाजाही को लेकर कोई स्थायी समझौता नहीं किया है। फिर भी कूटनीतिक संवाद ने फिलहाल स्थिति को संभालने में मदद की है।
क्यों बढ़ा बाजार
दरअसल दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती है। यह मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसलिए यदि यह मार्ग बंद हो जाए तो वैश्विक तेल कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।
हाल के संकेतों से बाजार को उम्मीद मिली कि यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं होगा। इसी उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक बढ़ाया और बाजार को सहारा दिया।
तेल की कीमतें अभी भी जोखिम
हालांकि बाजार की तेजी के बावजूद जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
भारत के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। यदि तेल महंगा रहता है तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और रुपये पर भी दबाव आ सकता है।
इसी वजह से विशेषज्ञ फिलहाल बाजार में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतें आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगी।