खाड़ी क्षेत्र में हमलों से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार, वैश्विक बाजार को संभालने के लिए 40 करोड़ बैरल तेल जारी करेगा IEA

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर लगातार हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता गहराने लगी है।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से तेल बाजार लगातार उतार-चढ़ाव देख रहा है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसके बाद भी बाजार में अस्थिरता जारी रही। गुरुवार को कीमतों में फिर तेज उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया।

इसी दौरान अमेरिकी बेंचमार्क कच्चा तेल भी महंगा हुआ। इसकी कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों और आपूर्ति के जोखिम ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी है।

इस तनाव की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियां हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में शामिल है। वैश्विक कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की अस्थिरता तुरंत बाजार को प्रभावित करती है।

इसी बीच कई हमलों की खबरें सामने आईं। इराक के अल-फाव बंदरगाह के पास दो विदेशी तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया। इसके कुछ घंटे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में एक थाई मालवाहक जहाज पर हमला हुआ।

इसके अलावा ओमान के सलालाह बंदरगाह में ईंधन भंडारण टैंकों पर ड्रोन हमले की भी जानकारी मिली। वहीं खाड़ी के समुद्री क्षेत्र में तीन अन्य जहाजों पर भी प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया।

इन घटनाओं के बीच क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय रहीं। कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही रोक दिया।

हालांकि इसके बावजूद तनाव कम नहीं हुआ। खाड़ी क्षेत्र में अब तक कम से कम 16 जहाज हमलों का शिकार हो चुके हैं। यह घटनाएं उस समय हो रही हैं जब ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।

इसी बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने रणनीतिक भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का निर्णय लिया है। यह कदम कीमतों में आई तेजी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

इस फैसले का समर्थन एजेंसी के सभी 32 सदस्य देशों ने किया। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ने इसमें प्रमुख भूमिका निभाई और करीब 17.2 करोड़ बैरल तेल देने की घोषणा की।

यह कदम 2022 में उठाए गए कदम से भी बड़ा है। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद करीब 18.27 करोड़ बैरल तेल जारी किया गया था।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह आपूर्ति केवल सीमित राहत दे सकती है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होती है तो यह भंडार लगभग 20 दिनों की कमी को ही पूरा कर पाएगा।

दूसरी ओर दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है। भारत ने भी इस पहल का समर्थन किया और वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए सहयोग का भरोसा दिया।

इसी बीच जापान ने भी सक्रिय कदम उठाने का संकेत दिया। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची  ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय मंजूरी का इंतजार किए बिना ही अपने तेल भंडार से करीब 8 करोड़ बैरल जारी करेगा।

कुल मिलाकर खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर वैश्विक बाजार की नजर बनी रहेगी।


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