होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय तेल टैंकरों को रास्ता, जयशंकर की ईरान से बातचीत के बाद राहत
khabarworld 12/03/2026 0
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर तेज कूटनीतिक कदम उठाए। इसी प्रयास का असर गुरुवार को दिखाई दिया। ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। यह फैसला विदेश मंत्री जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद सामने आया।
दरअसल, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति तेजी से बदली है। ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ा दी। ऐसे माहौल में भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय कूटनीति शुरू की।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को तुरंत प्रभावित करता है।
इसी कारण नई दिल्ली ने स्थिति को गंभीरता से लिया। सरकार ने तेजी से कूटनीतिक संपर्क बढ़ाए ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। सूत्रों के अनुसार भारत का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति बाधित न हो।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं। यदि इन मार्गों में बाधा आती है तो इसका असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ सकता है।
इसी बीच ईरान ने भारतीय टैंकरों को मार्ग उपयोग करने की अनुमति दी। हालांकि खबरों के अनुसार अमेरिका, यूरोप और इज़राइल से जुड़े कुछ जहाजों को इस जलमार्ग में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति क्षेत्र में जारी राजनीतिक तनाव को भी दर्शाती है।
दूसरी ओर भारत ने केवल ईरान तक ही बातचीत सीमित नहीं रखी। विदेश मंत्री जयशंकर ने अन्य प्रमुख देशों से भी संपर्क किया। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से भी चर्चा की। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
इससे पहले इस महीने एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया था। ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है। साथ ही उसने चेतावनी दी थी कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।
इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी। इसी दौरान क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की कथित तौर पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में मौत की खबर सामने आई।
इन घटनाओं का असर भारत के ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय तनाव और आपूर्ति में रुकावट के कारण देश में कमर्शियल एलपीजी की कमी महसूस होने लगी। इसका सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ा।
बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई जैसे शहरों में कई रेस्टोरेंट ने चेतावनी दी कि गैस आपूर्ति बाधित रही तो उन्हें संचालन बंद करना पड़ सकता है। उद्योग संगठनों ने बताया कि कई जगह रविवार से गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित रही।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार मुंबई में लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट ने अस्थायी रूप से काम बंद किया। वहीं चेन्नई होटल्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की।
इसी बीच 7 मार्च को एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई। घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ी। वहीं कमर्शियल सिलेंडर करीब 115 रुपये महंगा हो गया।
कमी के कारण कुछ जगहों पर कालाबाजारी भी देखने को मिली। कई बाजारों में एक सिलेंडर की कीमत 2000 से 2500 रुपये तक पहुंच गई।
इन हालात के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों को एलपीजी आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और घबराहट को रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाने को कहा।
फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय टैंकरों को सुरक्षित रास्ता मिलने से तत्काल राहत मिली है। सरकार को उम्मीद है कि सक्रिय कूटनीति के जरिए भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखेगा।
